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एक ओर भ्रष्टाचार पर डिजिटल प्रहार, दूसरी ओर वैश्विक व्यापार का विस्तार – रेल भूमि पोर्टल और भारत – यूके एफटीए का ऐतिहासिक संगम

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी –  गोंदिया (महाराष्ट्र)। वैश्विक स्तर पर भारत आज विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। जिसका प्रमाण, बीती 14 जुलाई 2026 से केंद्रीय रेलवे मंत्रालय ने रेलवे पोर्टल की भी शुरुआत की क्योंकि विजन को प्राप्त करने के लिए आंतरिक भ्रष्टा चार मुक्त पारदर्शिता, जवाब देही, कर्तव्यों कों बढ़ाकर सुशा सन लाना जरूरी है, तो दूसरी ओर 56 से अधिक देशों से एफटीए जिसमें बीती दिनांक 15 जुलाई 2026 से ब्रिटेन यूके एफटीए की शुरुआत हुई, 99 प्रतिशत वस्तुएं कर मुक्त होगी और इसी दिन मुंबई व कोलकाता के बंदरगाहों से निर्यात शुरू हो गया है।
मैं एडवोकेट किशन सन मुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि भारत-यूके मुक्त व्यापार सम झौता, व भारतीय रेलवे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विकसित भारत 2047 की दिशा में यह दोनों आर्थिक व पारदर्शिता का ऐतिहासिक कदम हैँ। इस लक्ष्य की प्राप्ति में नई रेल लाइनें डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर, तीसरी-चैथी लाइन, स्टेशन पुनर्विकास, बुलेट ट्रेन और अन्य आधारभूत परि योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। लेकिन वर्षों से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर किसानों भूमि धारकों और आम नागरिकों के बीच अनेक शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से रेल मंत्री द्वारा 14 जुलाई 2026 से रेल भूमि पोर्टल की शुरुआ त की गई है, जिसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाना है।
साथियों बात अगर हम भारत-यूके मुक्त व्यापार सम झौता विकसित भारत 2047 की दिशा में ऐतिहासिक आर्थि क कदम कों समझने की करें तो 15 जुलाई 2026 से भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता प्रभावी हो ने को इसी दिन मुंबई और कोलकाता बंदरगाहों से विशेष कार्यक्रम के माध्यम से निर्या त की नई शुरुआत की गई। इस समझौते के तहत यूके ने भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यातित उत्पादों को शून्य या शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्रदान की है, जिससे वस्त्र, चमड़ा, इंजीनियरिंग, समुद्री उत्पाद, रत्न-आभूषण, फार्मा, कृषि एवं एमएसएमई क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। दूसरी ओर भारतीय व्यापारियों को वि शाल ब्रिटिश बाजार में प्रति स्पर्धात्मक बढ़त, निवेश और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे, जबकि उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद, अधिक विकल्प और दीर्घकाल में प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिल सकता है यह समझौता निर्यात, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और विदेशी निवेश को गति देकर भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य, आत्म निर्भर भारत, मेक इन इंडिया और भारत को वैश्विक व्यापा रिक शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सटीकता से मील का पत्थर सिद्ध होगा। साथियों भूमि किसी किसान के लिए केवल संपत्ति नहीं हो ती, बल्कि उसकी आजीविका पहचान और आने वाली पीढ़ि यों का आधार होती है। इस लिए जब किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए भूमि अ धिग्रहित की जाती है, तब य ह आवश्यक हो जाता है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत हो। भारत में यह प्रक्रिया उचित मुआवजा एवं भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 20 13 के अनुसार संचालित होती है,जिसमें किसानों को उचित मुआवजा, पुनर्वास तथा पुन र्स्थापन का अधिकार दिया गया है। हालाँकि व्यवहारिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण के दौरान समय-समय पर अनेक प्रकार की अनियमितताओं के आरोप भी सामने आते रहे हैं। कई मामलों में यह आरोप लगाए गए कि अधिग्रहण की प्रारंभिक सूचना या प्रस्ताव सार्वजनिक होने के बाद संबं धित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में परिवर्तन कराने, कृषि भूमि को गैर- कृषि अथवा व्यावसा यिक श्रेणी में परिवर्तित कराने, कृषि भूमि स्टेटस से भूमि का मूल्य बढ़ाने अथवा अधिक मु आवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से दस्तावेजों में बदलाव कराने के प्रयास किए जाते रहे हैं, जो मैंने हमारी भूमि जब रेलवे अधिकरण में गई थी तो उस समय पूरा नजारा मैंने स्वयं देखा था कि किस तरह पड़ित जमीन को, चालू व कमर्शियल दिखाकर मिली भगत से पैसे वसूले गए, कुछ मामलों में सं बंधित अधिकारियों या अन्य हितधारकों की भूमिका पर भी प्रश्न उठे हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ऐसे आरोपों की सत्यता प्रत्येक मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही निर्धारित होती है, इसलिए सभी मामलों या सभी अधिकारियों के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालना उ चित नहीं होगा।
साथियों, यही वह पृष्ठ भूमि है जिसमें रेल भूमि पोर्टल एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में सामने आया है। यदि अधि ग्रहण की अधिसूचना, भूमि की मूल स्थिति, भूमि उपयोग की श्रेणी, स्वामित्व, राजस्व रिकाॅर्ड, मूल्यांकन, दस्तावेजों में हुए परिवर्तन तथा मुआवजे की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से समय-मुद्रित (टाइम-स्टा म्पड) होकर दर्ज होगी, तो अधिसूचना के बाद किए गए किसी भी संदिग्ध परिवर्तन की पहचान करना पहले की तुल ना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। इससे रिकाॅर्ड में छेड़ छाड़ फर्जी दस्तावेज, मनमा ना वर्गीकरण तथा अनियमित मुआवजे जैसी संभावित गड़ बड़ियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
साथियों, रेल भूमि पोर्टल का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब भूमि स्वामी स्वयं अपने अधिग्रहण की स्थिति आॅन लाइन देख सकेंगे। उन्हें यह जानकारी मिलेगी कि उन की फाइल किस स्तर पर है, कौन-सा दस्तावेज लंबित है, मूल्यांकन कब हुआ, मुआवजे की राशि कितनी निर्धारित हुई और भुगतान किस चरण में है। इससे सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर कम होंगे और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। इस नई व्यव स्था का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि रेलवे, जिला प्रशासन और राज्य सरकार के बीच समन्वय अधिक मजबूत होगा। पहले अलग-अलग वि भागों में फाइलों के आदान- प्रदान में महीनों लग जाते थे, जिससे परियोजनाएँ भी प्रभा वित होती थीं और किसानों को मुआवजा मिलने में भी देरी होती थी। अब डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर सभी संबंधित विभाग वास्तविक समय में जानकारी साझा कर सकेंगे। साथियों किसानों के लिए यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे अपने भूमि अभिलेख, खसरा -खतौनी, आधार, बैंक खाता, नामांतरण तथा अन्य आवश्य क दस्तावेजों को अद्यतन रखें। डिजिटल प्रणाली में सही रि काॅर्ड होने से मुआवजा भुगता न की प्रक्रिया अधिक तेज और विवादरहित होगी।यदि किसी किसान को भूमि के मूल्यांकन, मुआवजे की राशि अथवा अधिग्रहण प्रक्रिया पर आपत्ति हो, तो वह संबंधित भूमि अधिग्रहण अधिकारी, जिला प्रशासन अथवा कानून के अंतर्गत उपलब्ध अपील के अधिकार का उपयोग कर स कता है। डिजिटल रिकाॅर्ड होने से ऐसे मामलों की जांच भी अधिक पारदर्शी और सा क्ष्य – आधारित हो सकेगी।
साथियों, यह समझना भी आवश्यक है कि केवल डिजि टल पोर्टल बन जाने से सभी प्रकार कीअनियमितताएँ स्वतः समाप्त नहीं हो जाएँगी। इस की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारों के भूमि अभिलेख पू री तरह डिजिटाइज हों, सभी परिवर्तनों का आॅडिट ट्रेल उप लब्ध हो, जवाबदेही तय की जाए, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के वि रुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। यदि इन सभी पहलुओं पर समान रूप से ध्यान दिया गया, तो रेल भूमि पोर्टल भूमि अधि ग्रहण व्यवस्था में ऐतिहासि क परिवर्तन लाॅ सकता है। साथियों, भारत में रेलवे केवल परिवहन का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक विकास का इंजन है। नई रेल लाइनें बनने से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलता है, उद्योगों को सस्ता परिवहन उपलब्ध होता है, रोज गार के अवसर बढ़ते हैं और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलती है। इसलिए यह आव श्यक है कि विकास और कि सानों के अधिकार दोनों के बीच संतुलन बना रहे। यदि रेल भूमि पोर्टल का प्रभावी और ईमानदारीपूर्वक क्रियान्व यन किया गया, तो भूमि अधि ग्रहण प्रक्रिया में वर्षों से चली आ रही अनेक समस्याओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इससे वास्तविक भूमिधारकों को समय पर उचित मुआवजा मिलेगा, रिकाॅर्ड में अनियमित परिवर्तन की संभावनाएँ कम होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और सार्वजनिक परियोजनाओं पर जनता का विश्वास भी मज बूत होगा।
साथियों, अंतरराष्ट्रीय अनु भव भी यही बताते हैं कि डि जिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कमकरती है परियोजनाओं की गति बढ़ाती है और नागरिकों का विश्वास मजबूत करती है। जापान, दक्षिण कोरिया तथा अनेक यूरोपीय देशों में डिजिटल भूमि रिकाॅर्ड और ऑनलाइन अधिग्रहण प्रणाली ने आधारभूत संरचना विकास को अधिक पारदर्शी बनाया है। भारत का यह कदम भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन का रास्ता विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि कहा जा सकता है कि रेल भूमि पोर्टल केवल एक डिजिटल प्लेटफाॅर्म नहीं, बल्कि भारत में भूमि अधिग्रहण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-आ धारित बनाने की दिशा में ए क ऐतिहासिक सुधार है। यदि इसे कानून के कठोर पालन, सशक्त डिजिटल निगरानी और प्रभावी प्रशासनिक जवाब देही के साथ लागू किया गया, तो यह किसानों के अ धिकारों की रक्षा करते हुए विकास परियोजनाओं को नई गति देने वाला एक मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।

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