(बी0के0 सिंह)
सीतापुर। आल इंडियन प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (ऐप्जा) के तत्वाधान में तहसील लहरपुर इकाई तथा सक रन व तंबौर के पत्रकारों ने पत्रका रों की सुरक्षा एवं स्वतंत्र पत्र कारिता के मुद्दे को लेकर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) लह रपुर को ज्ञापन सौपा गया है। पत्रकारों ने थाना सकरन में दर्ज एफआईआर संख्या 0220 की निष्पक्ष एवं उच्च स्त रीय जांच तथा मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की है।
संगठन ने प्रशासन को 25 जुलाई 2026 तक का अल्टी मेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई तो 24 जुलाई से तहसील परिसर में अनिश्चित कालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। ज्ञापन में कहा गया है कि 20 जुलाई 2026 को थाना सकरन में पत्रकार सतीश सिंह के विरुद्ध एफआई आर संख्या 0220 दर्ज की गई। संगठन का आरोप है कि यह मुकदमा बी-पैक्स समिति से संबंधित समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद उत्पन्न रंजिश के चलते दर्ज कराया गया है। ऐप्जा का कहना है कि पत्रकार ने निष्पक्ष एवं निर्भीक पत्रकारिता करते हुए समाचार प्रकाशित किया था, जिसके कारण उन्हें झूठे मुक दमे में फंसाने का प्रयास किया गया। संगठन ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि घटना से संबंधित वीडियो रिकार्डिंग, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान तथा अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रा निक साक्ष्य उपलब्ध हैं। यदि इन सभी साक्ष्यों की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच कराई जाए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि किसी पत्रकार को केवल समाचार प्रकाशित करने के कारण झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है तो यह न केवल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता पर गंभीर हमला है, बल्कि लोकतंत्र के चैथे स्तंभ को कमजोर करने का प्रयास भी माना जाएगा। प्रार्थना पत्र में संगठन ने प्रशा सन के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं। इनमें एफआईआर संख्या 0220 की किसी वरिष्ठ अद्दि कारी से उच्च स्तरीय एवं निष्प क्ष जांच कराना, घटना से जुड़े सभी वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकार्डिंग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक जांच कराना, जांच पूरी होने तक किसी भी निर्दोष पत्रकार के विरुद्ध पक्षपातपूर्ण अथवा उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करना तथा यदि जांच में मुक दमा दुर्भावनापूर्ण, रंजिशवश अथवा असत्य तथ्यों के आ धार पर दर्ज पाया जाए तो उसे समाप्त कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने की मांग शामिल है। संग ठन ने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान थाना प्र भारी (एसएचओ) सकरन की भूमिका पक्षपातपूर्ण, लापरवा हीपूर्ण या नियमों के विपरीत पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी विभागीय एवं कानूनी कार्र वाई की जाए। साथ ही जनपद के सभी पत्रकारों के साथ निष् पक्ष, सम्मानजनक एवं संवैद्दा निक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार का उत्पीड़न न हो। प्रार्थना पत्र के अंत में एप्जा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 25 जुलाई 2026 को प्रातः 10ः00 बजे तक उनकी मांगों पर कोई ठोस एवं न्यायो चित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन 24 जुलाई 2026 को प्रातः 10ः00 बजे से उप जिलाधिकारी कार्यालय, तह सील लहरपुर परिसर में अनि श्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संगठन ने यह भी कहा है कि वह लोक तांत्रिक एवं संवैधानिक अधि कारों के तहत उत्तर प्रदेश शा सन, राज्यपाल, मानवाधिकार आयोग तथा अन्य सक्षम न्या यिक मंचों का भी दरवाजा खट खटाएगा। संगठन ने कहा कि यदि धरना-प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उप जिला धिकारी धामिनी एस दास ने तथ्यों व सबूतो का अवलोकन एक सप्ताह की समय अवद्दि देते हुए मामले की जांच किए जाने के बाद अग्रिम कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से ऐप्जा तहसील अध्यक्ष अभि नव त्रिवेदी, महामंत्री आकाश सिंह, प्रभारी एहतिशाम बेग, देशप्रीत सिंह, ओमकार वर्मा, आलम अंसारी, खुर्शीद गौरी, खालिद मंसूरी, विश्व पाल सिंह, राममोहन राजपूत, आशु मलिक, रिंकू शुक्ला, अजीत जायस वाल, विपिन तिवारी, अभिषेक मिश्रा, मिंटू गोस्वामी, समीर अंसारी, अरविंद, अंशुमान शुक्ला, जितिन प्रसाद, छोटेलाल, रिते श कुमार, इरफान, प्रेम कुमार, मेराज, अतीक, मसूद खान, राजेश कुमार, अमरेंद्र कुमार मिश्रा, सतीश कुमार सिंह, विकास कुमार सहित पत्रकार मौजूद रहे।
ऐप्जा ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
