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वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश करती हैं तो उन्हें स्थिर राजनीतिक माहौल, विशाल उपभोक्ता आधार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन तीनों एक साथ मिलते हैं

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तर पर भारत आज केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है,बल्कि यह विश्व के लिए आशा, स्थिरता और अवसरों का केंद्र बन चुका है। भारत आज जिस मुकाम पर खड़ा है, उसे केवल एक राष्ट्र की उपलब्धि कहना कम होगा। यह 21वीं सदी के उस नए युग की शुरुआत है यह स्वतं त्रता के 75 से अधिक वर्षों की यात्रा में भारत ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि, लोक तंत्र केवल एक शासन पद्धति नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा है। इसके साथ ही, भारत की जनसांख्यिकी और विशाल स्किल्ड वर्कफोर्स ने उसे ऐसे मुकाम पर ला खड़ा किया है, जहां से वह न केवल अपने नागरिकों के भविष्य को संवार सकता है, बल्कि पूरे विश्व के विकास की दिशा भी तय कर सकता है।
मैं एडवोकेट किशन सन मुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र से, यह लेख तीन मुख्यस्तंभों, लोकतंत्र की शक्ति, जन सांख्यिकीय लाभ और स्किल्ड वर्कफोर्स की क्षमता पर आधारित है, जिनकी वज ह से भारत और उसके वैश्विक साझेदारों के बीच हर रिश्ते को ‘विन-विन सिचुएशन’ के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। साथियों बात अगर हम भारत की पहली सबसे बड़ी ताकत की करें तो,भारत दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद से आज तक भारत ने चुनावों के जरिए सत्ता परिवर्तन, नीति निर्माण और नागरिक अधि कारों को जिस मजबूती से कायम रखा है, वह विश्व के लिए उदाहरण है। लोकतंत्र का अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक भागीदारी, न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता और पारदर्शी शासन की नींव पर खड़ा है। विविधता में एकता इसका सबसे बड़ा परिचायक है, जहां 22 आधिकारिक भाषा एँ, हजारों बोलियाँ, सैकड़ों धर्म-संप्रदाय और अलग-अलग संस्कृतियाँ होने के बावजूद लोग लोकतांत्रिक रूप से एक जुट रहते हैं। भारत का लोक तंत्र वैश्विक कंपनियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है क्योंकि वे जानती हैं कि यहां नीतियाँ पारदर्शी हैं, कानून का शासन है और निवेशकों के हितों की रक्षा की जाती है। दुनिया के कई हिस्सों में अधिनायकवाद और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिलती है। अफ्रीकी और एशियाई देशों में सत्ता परिव र्तन अक्सर हिंसा और अराज कता का कारण बनते हैं।
इसके विपरीत भारत ने अपने लोकतांत्रिक ढांचे से स्थि रता का माहौल तैयार किया है। यही कारण है कि विश्व की बड़ी कंपनियाँ भारत को ‘सेफ हैवन’ के रूप में देखती हैं। चीन या रूस जैसे देशों में निवेश करने पर राजनीतिक जोखिम अधिक होता है, जब कि भारत में लोकतंत्र यह सुनि श्चित करता है कि नीतियाँ स्थिर रहें और निवेश सुरक्षित रहे। यह लोकतंत्र की वही शक्ति है जो भारत को अलग पहचान दिलाती है।
साथियों बात अगर हम भारत की दूसरी सबसे बड़ी ताकत की करें तो वह है उसकी जनसांख्यिकी। वर्तमान समय में भारत की आबादी लगभग 1.43 अरब है और इसमें से 65 पेर्सेंट से अधिक लोग 35 वर्ष से कम आयु वर्ग में आते हैं। यह स्थिति भारत को दुनियाँ की सबसे युवा आबादी वाला देश बना ती है। युवा आबादी किसी भी राष्ट्र के लिए ऊर्जा, नवा चार और विकास का प्रतीक होती है। जब यूरोप और जा पान जैसे विकसित देश बूढ़ी होती आबादी की समस्या से जूझ रहे हैं, तब भारत के पास एक ऐसा डेमोग्राफिक एडवां टेज है जो उसे वैश्विक अर्थव्य वस्था का इंजन बना सकता है। भारत की युवा पीढ़ी तक नीक अपनाने में सबसे आगे है। वे न केवल नई तकनीकों को अपनाते हैं बल्कि स्टार्ट अप्स और उद्यमिता की ओर भी बढ़ रहे हैं।
यही कारण है कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजि टल इंडिया’ जैसी योजनाएँ इसी युवा ऊर्जा का परिणाम हैं। यह डेमोग्राफिक डिविडेंड भारत को न केवल घरेलू विका स की दिशा में मजबूत बना रहा है बल्कि विश्व के लिए भी अवसर पैदा कर रहा है। भारत की यह जनसांख्यिकी वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। भारत हर साल लाखों इंजी नियर, डाक्टर और मैनेजमेंट प्रोफेशनल तैयार करता है। यह वर्कफोर्स पूरी दुनिया की जरूरतें पूरी करता है। भार तीय पेशेवर आज अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और अफ्री का तक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। यह युवा आबादी उपभोक्ता बाजार के रूप में भी बेहद आकर्षक है। युवा वर्ग नई तकनीकों, डिजिटल सेवाओं और उपभोक्ता उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार है। यही कारण है कि वैश्विक कंपनि याँ भारत को भविष्य का सबसे बड़ा बाजार मानती हैं।
साथियों बात अगर हम भारत की तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शक्ति की करें तो वह है उसका विशाल स्किल्ड वर्कफोर्स। भारत के पास आज दुनिया का सबसे बड़ा स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स पूल है।
आईटी, हेल्थकेयर, इंजी नियरिंग, रिसर्च, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीयों ने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया में पहचान बनाई है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर वैश्विक आईटी हब के रूप में उभर चुके हैं। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स अमेरिकी सिलिकॉन वैली की कंपनियों के लिए रीढ़ की हड्डी बन चुके हैं। हेल्थकेयर के क्षेत्र में भारतीय डाक्टर और नर्स पूरी दुनिया में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान यह साफ दिखाई दिया कि भारतीय मेडिकल प्रोफेशनल्स की क्षमता कितनी विशाल है।
मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्ट अप्स के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने विदे शी निवेशकों को आकर्षित किया है और भारत में उत्पा दन का माहौल तैयार किया है। भारत का स्टार्टअप इका ेसिस्टम भी दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जिसने लाखों रोजगार पैदा किए हैं। यह स्किल्ड वर्कफोर्स केवल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार और विकास के लिए भी अहम है। साथियों बातें कर हम इन तीनों कारकों, लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स, का संगम भारत को विश्व की बड़ी कंपनियों और सरकारों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने की करें तो, जब कंपनियाँ भारत में निवेश कर ती हैं तो उन्हें स्थिर राजनीतिक माहौल, विशाल उपभोक्ता आ धार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन तीनों एक साथ मिल ते हैं। यही कारण है कि एप्पल, गूगल, माइक्रोसाफ्ट, अमेजन और टेस्ला जैसी कंपनियाँ भारत को भविष्य का हब मान रही हैं। भारत और उसके वैश्विक साझेदारों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं।
यह संबंध वास्तव में परस्पर लाभकारी है। भारत को रोज गार, तकनीक और निवेश मिल ता है, जबकि कंपनियों को लागत में कमी, स्थिर वाताव रण और विशाल बाजार तक पहुंच मिलती है।
इस प्रकार यह रिश्ता ‘विन-विन सिचुएशन’ का प्रतीक बन जाता है। हालांकि भारत के सामने कुछ चुनौति याँ भी हैं। शिक्षा और कौशल मेंअसमानता, आधारभूत ढाँचे की कमी, गरीबी और बेरोज गारी जैसी समस्याएँ अभी भी मौजूद हैं। लेकिन भारत सर कार ‘स्किल इंडिया’, ‘डिजि टल इंडिया’, ‘गति शक्ति योज ना’ और ‘आत्मनिर्भर भारतष् जैसे अभियानों से इन चुनौ तियों को अवसरों में बदलने का प्रयास कर रही है। यदि ये प्रयास सफल होते हैं तो भारत अपनी जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स का पूरा लाभ उठा सकेगा।
अंततः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यह स्पष्ट है कि भारत की शक्ति तीन स्तंभों पर आधारित है, लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स। ये तीनों मिलकर भारत को न केवल विश्व की आर्थिक महाशक्ति बना रहे हैं, बल्कि इसे एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार भी बना रहे हैं। भारत का विकास मॉडल शून्य-योग नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए अवसर पैदा करता है। आने वाले दशकों में जब दुनिया नए संकटों और अवसरों से गुजरेगी, तब भारत अपनी लोकतांत्रिक ताकत, युवा ऊर्जा और स्किल्ड वर्क फोर्स के दम पर पूरे विश्व के लिए आशा और सहयोग का केंद्र बना रहेगा।
यही भारत की असली पहचान है-एक ऐसा राष्ट्र जो अपने विकास के साथ- साथ पूरे विश्व की प्रगति में योगदान देता है और हर वैश्विक साझेदारी को वास्त विक ‘विन-विन’ बनाता है।

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