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धनतेरस का धमाल,दीपावली की जगमगाहट और भाई दूज के रिश्तों की मिठास, ट्रंप सहित पांच राज्यों के गवर्नर और 20 से अधिक मेयर भी हुए भारतीय संस्कृति के मुरीद आस्था, अध्यात्म, आरोग्य, समृ(ि और पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तर पर धनतेरस से दीपावली और भाई दूज तकरू छह दिनों का आध्यात्मिक,सांस्कृतिक और सामाजिक महोत्सव 6 नवंबर 2026 शुक्रवार को धनतेरस के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ हो गया है, जिसका समापन 11 नवंबर बुधवार को भाई दूज के साथ होगा।भारत में दीपावली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं,बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत, वैदिक दर्शन,पारिवारिक एकता, आर्थिक गतिविधियों पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक सद्भाव का अद्भुत संगम है।इस दौरान देश के महानगरों से लेकर छोटे कस्बों और गांवों तक बाजारों की रौनक,घरों की सजावट दीपों की जगमगा हट, पूजा-अर्चना और खरीदारी का उत्साह देखते ही बनेगा।धनतेरस पर सोना,चांदी, पीतल, तांबा और नए बर्तनों की खरीदारी की परंपरा भारतीय परिवारों में समृद्धि और शुभारंभ की कामना का प्रतीक है। इसी दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना करके आरोग्य और दीर्घायु की मंगल कामना बहुत ही भावपूर्ण मन से की गई। इस प्रकार दीपोत्सव का पहला संदेश ही स्पष्ट है कि वास्तविक धन केवल संपत्ति नहीं,बल्कि स्वस्थ शरीर,प्रसन्न मन और संतुष्ट परिवार भी है। मैं एडवोकेट किशन षणमुख दास भावना की गोंदिया महाराष्ट्र 6 नवंबर 2026 को शाम 6 बजे बाजारों की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर पाया क़ि धनतेरस से दीपोत्सव का शंखनाद हुआ,आस्था के साथ बाजारों में आर्थिक गति विधियों का महाकुंभ!
दीपावली का आगमन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी विशेष महत्व रखता है।आभूषण वस्त्र,इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन,घरेलू उपकरण, मिठाइयों सजावटी सामग्री, मिट्टी के दीपकों और हस्तशिल्प से जुड़े व्यापारियों के लिए यह वर्ष का महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर होता है। छोटेदुकानदारों, कारीगरों, कुम्हारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उत्पादकों को भी इस पर्व से रोजगार तथा आय के अवसर मिलते हैं। इसलिए दीपावली पर स्थानीय दुकानदारों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सार्थक कदम हो सकता है।हालांकि उत्सव की चमक के बीच अना वश्यक कर्ज,दिखावे और प्रतिस् पर्धात्मक खरीदारी से सटिका से बचना भी आवश्यक है।
साथियों,समृद्धि का वास्तविक अर्थ अपनी सामर्थ्य के अनुसार खर्च करना और खुशियां बांटना है।धन्वंतरि का अवतार और वैदिक दर्शनरू आरोग्य ही जीवन का सबसे बड़ा धन! पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और भगवान विष्णु का अंशावतार माना जाता है। धनतेरस पर उनकी पूजा का गहरा संदेश यह है कि मनुष्य को धन अर्जित करने के साथ अपने स्वास्थ्य की रक्षा को भी सर्वाेच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। भारतीय परंपरामें पंचमहाभूत अर्थात आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को जीवन तथा प्रकृति का आधार माना गया है। इन तत्वों के संतुलन और स्वच्छ पर्यावरण के बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना संभव नहीं। इसी दिन प्रदोषकाल में यम दीप दान, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की परंपरा भी प्रचलित है। दीपदान को जीवन में शुभता, सुरक्षा और सकारात्मकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
साथियों, दीपावली का वैदिक रहस्य- अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय! दीपावली का आध्या त्मिक आधार केवल बाहरी रोशनी तक सीमित नहीं है। उपनिषदों में वर्णित प्रार्थना तमसो माँ ज्योतिर्गमय अर्थात हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो, इस पर्व के मूल दर्शन को अभिव्यक्त करती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम चौदह वर्षों का वनवास पूरा करके और रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्या वासियों ने दीप प्रज्वलित किए और तभी से दीपोत्सव की परंपरा को विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। मां महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों आद्यालक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, सौभाग्यलक्ष्मी, अमृतलक्ष्मी कामलक्ष्मी, सत्य लक्ष्मी, भोगलक्ष्मी और योगलक्ष्मी की अवधारणा समृद्धि के व्यापक अर्थ को सामने रखती है। वास्त विक लक्ष्मी केवल धन-संपत्ति नहीं, बल्कि विद्या,सौभाग्य, सदाचार स्वास्थ्य, संतोष और आध्यात्मिक उन्नति भी हैं। इसी संदर्भ में प्रचलित वैदिक प्रार्थना कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती’ मनुष्य को अपने कर्म, ज्ञान और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का महत्व समझाती है।
हाथों से अच्छे कर्म करना, किसी जरूरतमंद की सहायता करना और दूसरों का अहित न करना ही इस दर्शन का व्यावहारिक स्वरूप है।
साथियों, लक्ष्मी-गणेश पूजनरू धन के साथ सद्बुद्धि का अनिवार्य संगम! दीपावली की अमावस्या की रात्रि में महालक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा की परंपरा है।मां लक्ष्मी समृद्धि, वैभव और संपन्नता की प्रतीक हैं, जबकि गणेश जी बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के अधिष्ठाता माने जाते हैं।इस पूजा का सामाजिक और आर्थिक संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है कि धन तभी कल्याणकारी बनता है, जब उसका उपयोग विवेक, ईमानदारी और लोकहित में किया जाए। सद्बुद्धि के बिना संपत्ति अहंकार, अनैति कता और विनाश का कारण बन सकती है। इसलिए दीपा वली हमें धन कमाने के साथ उसे सही दिशा में लगाने की प्रेरणा भी देती है।
साथियों, नरक चतुर्दशीरू बुराइयों के अंत और आंतरिक शुद्धता का संदेश! छोटी दीपा वली के रूप में प्रसिद्ध नरक चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है। यह पर्व अन्याय, अहंकार और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक है। प्रातःकाल अभ्यंग स्नान, दीप प्रज्वलन और धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा प्रचलित है। इस अवसर पर मनुष्य को अपने भीतर मौजूद क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और द्वेष जैसी बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। यही आंतरिक स्वच्छता दीपोत्सव को वास्तविक अर्थ प्रदान करती है।
साथियों,गोवर्धन पूजारू गौसेवा अन्नकूट और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संदेश! दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज वासियों की रक्षा करने की कथा प्रकृति,पर्यावरण और सामुदा यिक एकता के महत्व को दर्शाती है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर पूजा,परिक्रमा और अन्नकूट का आयोजन किया जाता है। गायों और बैलों को स्नान कराकर सजाया जाता है तथा धूप, दीप, पुष्प और माला से उनका पूजन किया जाता है। भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गोवंश का योगदान कृषि, दुग्ध उत्पादन और जैविक खाद के माध्यम से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति के संसाधनों का सम्मान करने, पशुधन की रक्षा करने और अन्न का अपव्यय रोकने की प्रेरणा देती है।
साथियों, भाई दूज- भाई -बहन के प्रेम, विश्वास और आजीवन रिश्ते का भावनात्मक महापर्व! छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन 11 नवंबर को भाई दूज अथवा यम द्वितीया के साथ होगा। पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेव की पत्नी छाया से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। यमुना अपने भाई यमराज को बार-बार अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करती थीं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज बहन के घर पहुंचे तो यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान मांगने को कहा। यमुना ने प्रार्थना की कि इस दिन जो बहन अपने भाई को तिलक लगाकर भोजन कराए, उसके भाई को अकाल मृत्यु का भय न रहे। तभी से भाई दूज पर बहनें भाई के मस्तक पर मंगल तिलक लगा कर उसकी दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यह पर्व केवल भाई की सुरक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि बहन के सम्मान, स्नेह, सुरक्षा और दोनों के आजीवन भावना त्मक संबंधों का उत्सव भी है। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में इसका संदेश और भी महत्वपूर्ण है कि भाई-बहन एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहें और महिलाओं के सम्मान तथा सुरक्षा को पारिवारिक संस्कार का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।
साथियों प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती-उत्सव मनाइए लेकिन दूसरों की सांसों और स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं! दीपोत्सव के उल्लास के बीच पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी बनकर सामने आया है। दिल्ली-एनसीआर के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने 29
अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत 7 और 8 नवंबर को प्रमाणित ग्रीन पटाखों के सीमित उपयोग की अनुमति दी है। इनके इस्तेमाल का समय सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक निर्धारित किया गया है। 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ववत पूर्ण प्रतिबंध बहाल होगा। अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर रोक है। बैरियम युक्त पटाखों, सीरीज वाली लड़ियों तथा गैर-प्रमाणित पारंपरिक पटाखों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। केवल सीएसआईआर – नीरी से प्रमाणित और आवश्यक पीईएसओ अनुमोदन वाले ग्रीन पटाखों की निर्धारित बिक्री व्यवस्था लागू है। प्रत्येक पैकेट पर उत्पाद- विशिष्ट वैध क्यूरआर कोड और सीलबंद पैकिंग की जांच आवश्यक है तथा ऑनलाइन बिक्री पर रोक है। इन निर्देशों का उल्लंघन कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है। दिल्ली-एनसी आर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के ग्रैप संबंधी निर्देशों तथा वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र और प्रवेश संबंधी लागू प्रतिबंधों का भी पालन आवश्यक है। यह ध्यान रखना चाहिए कि पटाखों के ये विशेष आदेश दिल्ली-एनसीआर के लिए हैं; अन्य राज्यों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों के नियम लागू होंगे।
साथियों अमेरिका के व्हाइट हाउस में भी दीपावली का महा दीपोत्सव मनाया गया, दीपावली की वैश्विक स्वीकार्यता और भारतीय संस्कृति के बढ़ते अंतर राष्ट्रीय प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण अमेरिका में देखने को मिल रहा है। शुक्रवार,6 नवंबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के प्रतिष्ठित ओवल ऑफिस में दीपावली समारोह में शामिल होकर पारंपरिक दीप प्रज्वलित किए पांच अमेरिकी राज्यों के गवर्नरों और 20 से अधिक मेयरों ने भी मनाया भारतीय संस्कृति का पर्व!व्हाइट हाउस में दीपावली मनाने की परंपरा पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में शुरू हुई थी। वर्ष 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा व्हाइट हाउस में दीप प्रज्वलित करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे। प्रारंभ में ये आयोजन मुख्यतः आइजन हावर एग्जीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग में भारतीय- अमेरिकी समुदाय और भारतीय राजन यिकों की उपस्थिति में होते थे, लेकिन बाद में ईस्ट रूम, रूज वेल्ट रूम और ओवल ऑफिस तक पहुंचे। पिछले वर्ष भी राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में दीपावली मनाई थी, जिसमें भारत के राजदूत विनय क्वात्रा शामिल हुए थे। इस वर्ष अमेरिका में दीपावली की स्वीकार्यता ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। अमेरिकी प्रशांत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के पांच राज्यों इडाहो, नेब्रास्का, मोंटाना, नॉर्थ डकोटा और वाशिंगटन के गवर्नरों ने पहली बार अपने आधिकारिक सरकारी परिसरों में दीपावली समारोह आयोजित किए हैं, जबकि ओरेगन में 10 नवंबर को समारोह प्रस्तावित है।इसके अतिरिक्त 20 से अधिक मेयरों ने सिटी हॉल और नगर परिषदों में दीप प्रज्वलन कार्यक्रमों की मेजबानी की है।इन आयोजनों में अमेरिकी सीनेटरों, कांग्रेस सदस्यों, स्थानीय जन प्रतिनि धियों और भारतीय -अमेरिकी समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न राज्यों के नेताओं ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के व्यापार, तकनीक, शिक्षा, चि कित्सा, रोजगार और सामाजिक सेवा में योगदान की सराहना की है। विशेष बात यह है कि वाशिंगटन राज्य में दीपावली और बंदी छोड़ दिवस को आधिकारिक राज्यीय उत्सव के रूप में मान्यता देने की दिशा में भी विधायी पहल हुई है। यह घटनाक्रम बताता है कि भारतीय संस्कृति की रोशनी अब केवल भारत के घरों और मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि अमेरिका के सर्वाेच्च राजनीतिक कार्या लयों और सरकारी संस्थानों तक पहुंच चुकी है। यह भारतीय प्रवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक योगदान और वैश्विक प्रतिष्ठा का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि दीपावली केवल दीप जलाने का नहीं, जीवन को प्रकाशित करने का महापर्व है! धनतेरस हमें स्वास्थ्य और समृद्धि, नरक चतुर्दशी बुराइयों के विनाश, दीपावली सद्बुद्धि और सकारात्मकता, गोवर्धन पूजा प्रकृति तथा गौसेवा, और भाई दूज पारिवारिक प्रेम का संदेश देती है। छह दिनों का यह दीपोत्सव हमें याद दिलाता है कि स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ समाज, बुजुर्गों का सम्मान, महिलाओं की सुरक्षा, भाई- बहन का प्रेम और जरूरतमंदों की सहायता ही सच्चे उत्सव की पहचान हैं। आइए, इस दीपावली मिट्टी के दीपों से घर रोशन करें,स्थानीय व्यापारियों को प्रोत्साहन दें, प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करें, मिठास बांटें और किसी अकेले बुजुर्ग के जीवन में खुशियों का प्रकाश पहुंचाएं। क्योंकि असली दीपावली तब होगी, जब हर घर में खुशियां, हर चेहरे पर मुस्कान, हर मन में सद्भाव और हर जीवन में स्वास्थ्य एवं समृद्धि का उजाला होगा।

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