– सभी राष्ट्रीयताओं के लिए सहायता डेस्क, भारत नेपाल हिमालयी आपदा लचीलापन – डा राजेश्वर सिंह
– साझेदारी का आह्वान हिमालय ने अपनी चेतावनी दे दी है। अब यह हम पर है कि हमने उसे सुना है या नहीं
(संन्तोष उपाध्याय)
लखनऊ। नेपाल के रसुवा नुवाकोट क्षेत्र में आई भीषण आपदा पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए सरोजिनी नगर वि धायक डा. राजेश्वर सिंह ने भारतीय पीड़ितों के परिवारों हेतु 11 लाख की प्रारंभिक सहायता राशि, सभी राष्ट्री यताओं के लिए सहायता एवं परिवार समन्वय डेस्क तथा भारत-नेपाल के बीच दीर्घ कालिक हिमालयी जलवायु एवं आपदा लचीलापन साझेदारी का प्रस्ताव रखा है। गुरुवार सुबह नेपाली अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 165 शव बरामद किए जा चुके थे और 826 लोग लापता बताए गए थे। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ सुरक्षाकर्मी, पर्यटक और बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। आंकड़े खोज एवं बचाव अभियान के साथ लगातार बदल रहे हैं। डा. सिंह ने कहा- हर उस परिवार से, जो अपने प्रियजन के फोन की प्रतीक्षा कर रहा है-आपकी यह चिंता केवल आपकी नहीं है। आपदा की घड़ी में कोई विदेशी नहीं होताय केवल वे होते हैं जो संकट में हैं और वे जो उनकी मदद कर सकते हैं। उन्होंने नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, चिकित्सा दलों, हेलीकाप्टर कर्मियों और स्वयंसेवकों को नमन करते हुए भारत सरकार की त्वरित मानवीय प्रतिक्रिया की सराहना की। इस समय बयान से पहले बचाव, अटक ल से पहले सत्यापित सूचना और राष्ट्रीयता से पहले मान वता होनी चाहिए। पर्यावरण योद्धा की ओर से इस आपदा में जान गंवाने वाले अथवा लापता भारतीय नागरिकों के परिवारों हेतु 11 लाख की प्रारंभिक सहायता राशि उप लब्ध कराई जाएगी। सक्षम प्राधिकरणों के समन्वय से सत्यापित निकटतम परिजनों तक सहायता पहुंचाई जाए गी। डा. सिंह ने कहारू ष्कोई भी राशि ऐसी क्षति का उत्तर नहीं हो सकती। यह शोक का मूल्य नहीं, केवल इस बात का प्रतीक है कि ये परिवार अकेले नहीं हैं। डा. सिंह ने अपने सरोजिनी नगर कार्या लय में सहायता एवं परिवार समन्वय डेस्क स्थापित करने का निर्देश दिया है। यह डेस्क राष्ट्रीयता के भेद के बिना परिवारों की सत्यापित जानका री दर्ज करने तथा आवश्य कता के अनुसार उसे विदेश मंत्रालय, काठमांडू स्थित भार तीय दूतावास एवं संबंधित राजनयिक मिशनों तक पहुंचा ने में सहयोग करेगी। सहायता राशि भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए है, लेकिन सहायता डेस्क सबके लिए है। बाढ़ में बहती नदी पास पोर्ट नहीं पूछतीय करुणा को भी नहीं पूछना चाहिए।
हिमालय की चेतावनी प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार आपदा की शुरु आत उच्च हिमालयी क्षेत्र में बड़े बर्फ- शिला पतन से हुई हो सकती है।
प् ब्प्डव्क् के अनुसार त्रिशूली नदी में एक स्थान पर जलस्तर लगभग 30 मिन ट में नौ मीटर तक बढ़ा। डा. सिंह ने कहा – ‘तीस मिनट में नौ मीटर-ऐसी आपदा में केवल वही चेतावनी जीवन बचा सकती है जो स्वचालित हो और सीमाओं को मिनटों में पार कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विशिष्ट घटना को केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताना वैज्ञानिक रूप से जल्दबाजी होगी, लेकिन तेजी से गर्म होता हिमालय ग्लेशियरों, परमाफ्रॉस्ट, चट्टानी ढलानों और हिमनदीय झीलों की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है, हिमालय हमारे पौत्रों से नहीं, हमसे बात कर रहा है।
नेपाल आपदा – डा. राजेश्वर सिंह ने भारतीय पीड़ित परिवारों हेतु 11 लाख की सहायता की घोषणा की
