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टीबी रोगियों से संवाद के लिए स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं को मिला साफ्ट स्किल्स प्रशिक्षण

(राममिलन शर्मा)
रायबरेली। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत शुक्रवार को स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘सक्षम प्रवाह, ज्प्ैै के द्वारा काउंसलिंग साफ्ट स्किल्स’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को टीबी रोगियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने, संवेदनशील व्यवहार अपनाने तथा बेहतर काउंसलिंग कौशल विकसित करने के लिए प्रशि क्षित करना था। प्रशिक्षण कार्य क्रम एएनएम ट्रेनिंग सेंटर सी एमओ आफिस रायबरेली में आयोजित किया गया, जिसमें सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर (एसटीएस), सीनियर टीबी लैबोरेटरी सुपरवाइजर (एसटी एल एस), टीबी हेल्थ विजिटर सहित कुल 28 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. अनुपम सिंह ने बताया कि किसी भी टीबी रोगी के उपचार में दवाओं के साथ- साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का व्यवहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई बार रोगी की आधी परेशानी केवल संवेदन शील व्यवहार और सही संवा द से ही कम हो जाती है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के सहयोग से स्वास्थ्य कार्यकर्ता ओं के लिए ‘सक्षम प्रवाह प्रो जेक्ट के तहत काउंसलिंग साफ्ट स्किल्स’ प्रशिक्षण आयो जित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रशि क्षण के दौरान प्रतिभागियों को टीबी रोगियों से प्रभावी संवाद स्थापित करने, उनकी भावनाओं और मनोदशा को समझने तथा सामान अनुभूति व्यवहार एव निष्पक्ष भूमिका अपनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें संवाद शैली, हाव-भाव, बाडी लैंग्वेज और मरीजों का विश्वास जीतने के तरीकों पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
डा. सिंह ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कार्यकर्ता धैर्य, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ रोगियों से संवाद करेंगे तो मरीज उपचार के प्रति अधिक सकारात्मक रहेंगे और इलाज से जुड़ी कठिनाइयों को खुल कर बता सकेंगे। वहीं, रूखा या असंवेदनशील व्यवहार मरीजों को अपनी समस्याएं साझा करने से रोक सकता है। इसलिए प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता मरीजों को यह भरोसा दिलाएं कि टीबी का इलाज पूरी तरह निःशुल्क है और उनकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति उपचार में बा धा नहीं बनेगी। स्वास्थ्य विभाग हर कदम पर उनके साथ है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के व्यक्तिगत व्यवहार और तनाव प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यदि उनका व्यवहा र परिवार और कार्यस्थल दोनों जगह संतुलित और सकारात्म क होगा, तो उसका सकारात् मक प्रभाव उनकी कार्यशैली और रोगियों को दी जाने वा ली सेवाओं पर भी दिखाई देगा।
उप जिला क्षय रोग अद्दि कारी डा. शम्स रिजवान ने कहा कि यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इससे वे तकनीकी दक्षता के साथ- साथ टीबी रोगियों के साथ बेहतर संवाद और विश्वास का संबंध स्थापित कर सकेंगे, जो उपचार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशिक्षण टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (टी आईएसएस) की प्रशिक्षक डा. रेखा गुप्ता एवं सुनीता यादव द्वारा दिया गया।

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