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गर्भावस्था में योग – तनाव से राहत और प्रसव की तैयारी का प्रभावी माध्यम

(राममिलन शर्मा)
लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान पीठ दर्द, शरीर में सूजन, थकान, मूड स्विंग और प्रसव को लेकर चिंता जैसी चुनौ तियां आम हैं। ऐसे में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए मानसिक संबल और सुर क्षित मातृत्व की तैयारी का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। लखनऊ स्थित पीजी आई के मातृ एवं प्रजनन स्वास् थ्य वार्ड (मेटरनल एंड रिप्रोड क्टिव हेल्थ वार्ड) में पिछले आठ वर्षों से गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से योगाभ्यास कराया जा रहा है।
एसजीपीजीआई एक तृतीयक (टर्शियरी) स्वास्थ्य संस्थान है, जहां बड़ी संख्या में उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) गर्भावस्था वाली महिलाओं का उपचार होता है। इनमें से कई महिलाओं को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। ऐसे में शारीरिक चुनौतियों के साथ मानसिक तनाव और प्रसव को लेकर चिंता भी बढ़ जाती है। विशेष ज्ञों का मानना है कि योग इन दोनों पहलुओं से निपटने में मददगार साबित हो सकता है। एसजीपीजीआई के मटर्नल एंड रीप्रोडक्टिव हेल्थ (एमआर एच) वार्ड की स्टाफ नर्स रीता वर्मा बताती हैं कि गर्भवती महिलाओं को कराए जाने वाले कमर, हिप और पेल्विक क्षेत्र के स्ट्रेचिंग अभ्यास शरीर को अधिक लचीला बनाते हैं। इससे पीठ और कमर दर्द, सूजन तथा शरीर में जकड़न जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। वहीं डीप ब्रीदिंग के अभ्यास से शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है तथा तनाव कम होता है।
’योग शरीर को प्रसव के लिए करता है तैयार-सूर्या इंस्टीट्यूट की योगाचार्य वंदना मिश्रा के अनुसार गर्भावस्था में योग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शरीर को प्रसव के लिए तैयार करता है। योग से पेट के निचले हिस्से और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, पेल्विक जॉइंट्स को मजबूती मिलती है और शरीर अधिक लचीला बनता है।
इससे प्रसव के दौरान शरीर का सहयोग बेहतर होता है और सामान्य प्रसव की संभा वना बढ़ सकती है।
उन्होंने बताया कि आज की जीवनशैली में महिलाओं की शारीरिक सक्रियता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। ऐसे में योग स्टैमिना बढ़ाने, रक्त संचार को बेहतर बनाने और शरीर की प्राकृतिक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है। इसके साथ ही यह तनाव और एंग्जायटी को कम कर मानसिक संतु लन बनाए रखने में भी महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है।
ये अभ्यास हैं विशेष रूप से लाभकारी- गर्भवती महि लाओं को कराए जाने वाले प्रमुख अभ्यासों में तितली आसन (बटरफ्लाई एक्सरसा इज) शामिल है, जो पेल्विक फ्लोर को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करता है।
सुखासन विद डीप ब्रीदिंग शरीर में ऑक्सीजन की बेहतर आपूर्ति और मानसिक शांति के लिए कराया जाता है, जब कि भ्रामरी प्राणायाम तनाव कम करने, मन को शांत रखने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा ताड़ासन, पर्वतासन, मलासन, चेयर पोज, सूक्ष्म व्यायाम और अन्य स्ट्रे चिंग अभ्यास भी विशेषज्ञ की देखरेख में कराए जाते हैं। योगाभ्यास का चयन गर्भावस्था के चरण और महिला की स्वा स्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है। विशेष रूप से हाई -रिस्क गर्भावस्था में चिकित्स कीय सलाह को प्राथमिकता दी जाती है।
एसजीपीजीआई के एम आरएच वार्ड की अध्यक्ष डा. मंदाकिनी प्रधान का कहना है कि योग को जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से योग करना चाहिए, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इसका महत्व और भी अधिक है।
योग न केवल गर्भवती महि ला के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के स्वस्थ विकास में भी महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास, संतुलित आहार और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से गर्भावस्था को सुर क्षित, सहज और स्वस्थ बनाया जा सकता है। स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु को जन्म देती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करना मां और शिशु, दोनों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण और लाभकारी कदम है। 21 वर्षीय पूजा पिछले लगभग 20 दिनों से एसजीपीजीआई के एमआरएच वार्ड में भर्ती हैं। वह 28 सप्ताह की गर्भवती हैं, ट्विन प्रेग्नेंसी है और डायबिटीज अनियंत्रित है। उनका कहना है, ष्मैं नियमित रूप से योग करती हूं, जिससे मेरा शरीर सक्रिय रहता है और मन भी शांत महसूस करता है। जिस दिन किसी कारणवश योग नहीं कर पाती, उस दिन पूरे समय सुस्ती महसूस होती है। मैं डायबिटीज से भी पीड़ित हूं, लेकिन योग करने से मेरी शुगर काफी हद तक नियंत्रित रहती है।
गर्भावस्था के दौरान योग ने मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण मदद की है।
विश्व योग दिवस के अव सर पर यह पहल एक महत्व पूर्ण संदेश देती है कि योग केवल फिटनेस तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से संतुलित और प्रसव के लिए अधिक आत्मविश्वासी बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।

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