एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र) – वैश्विक स्तर पर 21 जून 2026 को पूरा विश्व 12वें अंतरराष् ट्रीय योगदिवस का उत्सव मना रहा है। आज योग केवल भारत की प्राचीन परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का स्वरूप बन चुका है।संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2014 में मान्यता मिलने के बाद योग ने जिस गति से विश्वभर में अपनी पहचान बनाई है, वह मानव इतिहास की सबसे सफल सांस्कृतिक और स्वास्थ्य यात्राओं में से एक मानी जा सकती है। आज दुनियाँ के लगभग हर देश में योग का अभ्यास किया जा रहा है और करोड़ों लोग इसे स्वस्थ जीवन शैली का आधार मान रहे हैं।
इस वर्ष 2026 का मुख्य विषय “स्वस्थ आयु के लिए योग” रखा गया है। यह विषय केवल लंबी आयु प्राप्त करने की बात नहीं करता, बल्कि इस बात पर बल देता है कि व्यक्ति बढ़ती उम्र में भी सक्रिय, आत्मनिर्भर, ऊर्जावान और मान सिक रूप से स्वस्थ बना रहे।
मैं एडवोकेट किशन सनमु खदास भावनानीं गोंदिया महा राष्ट्र दावे के साथ कह सक ता हूं कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब यह स्वीकार कर रहा है कि नियमित योगा भ्यास, प्राणायाम और ध्यान उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को संतु लित करने, तनाव कम करने, हृदय स्वास्थ्य बेहतर बनाने तथा मानसिक स्फूर्ति बनाए रखने में अत्यंत सहायक हैं। वर्ष 2026 का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐति हासिक रेड रोड पर आयोजित किया जा रहा है, जिसका नेतृ त्व भारत के प्रधानमंत्री कर रहे हैं। सिटी आफ जाय के नाम से प्रसिद्ध कोलकाता इस अवसर पर योग की वैश्विक राजधानी जैसा स्वरूप धारण कर चुका है। लाखों लोगों की भागीदारी, विशाल सामूहिक योगाभ्यास, सांस्कृतिक प्रस्तुति यां और आधुनिक तकनीक के समावेश ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है।
साथियों, इस वर्ष योग दिवस का सबसे बड़ा आक र्षण योग संगम है। अंतररा ष्ट्रीय योग दिवस के 11 सफल वर्षों के बाद 12वें संस्करण में देशभर के हजारों स्थानों पर एक साथ कामन योगा प्रोटोकाल के आधार पर सामू हिक योग प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। यह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाँ के अनेक देशों में भी समान समय पर योगा भ्यास के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
यह दृश्य वास्तव में एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक मानव ता कीभावना को साकार कर ता है। 2026 के आयोजन की एक और विशेषता डिजिटल भागीदारी है। माय भारत प्लेट फार्म और योग संगम पोर्टल के माध्यम से लाखों नागरिकों ने पंजीकरण कर इस वैश्विक उत्सव में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है। डिजिटल तकनीक ने योग को गांवों से महानगरों तक और भारत से विश्व के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह योग दिवस तक नीक और परंपरा के अद्भुत समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
साथियों, इस बार विशेष रूप से बुजुर्गों और अति बुजुर्गों के लिए योग को केंद्र में रखा गया है। आयुष मंत्रालय द्वारा ऐसे योगासन, प्राणायाम और ध्यान प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है जो जोड़ों के स्वास्थ्य, संतुलन लचीलेपन, श्वसन क्षमता और मानसिक शांति को बढ़ावा देते हैं। आज जब दुनियाँ तेजी से वृद्धावस्था की ओर बढ़ रही है, तब स्वस्थ आयु के लिए योग का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो गया है। बढ़ती उम्र को बीमारी का पर्याय मानने के बजाय सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जीने की प्रेरणा योग प्रदान करता है।
साथियों, योग दिवस 20 26 का एक अद्भुत आकर्षण कोलकाता में हुगली नदी पर लगभग 500 नावों पर सामू हिक योगाभ्यास तथा लगभग 3000 ड्रोन द्वारा प्रस्तुत मेगा ड्रोन शो है। परंपरा और आ धुनिक तकनीक का यह संगम दुनिया को यह संदेश देता है कि योग केवल अतीत की विरासत नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता भी है। ऐसे भव्य आयोजन युवाओं और बच्चों में योग के प्रति आकर्षण बढ़ाने में भी रूप से सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
साथियों, विश्व स्तर पर योग की बढ़ती लोकप्रियता का एक महत्वपूर्ण प्रमाण हाल ही में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 है। अहमदाबाद में आयोजित इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ि यों ने भाग लिया। भारत ने इस प्रतियोगिता में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक जीते, जिनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल थे। भारत विश्व पदक तालिका में प्रथम स्थान पर रहा और योगासन खेल के क्षेत्र में अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता सिद्ध की। प्रतियोगिता में भारत ने 102 स्वर्ण पदकों के अतिरिक्त शेष पदक रजत और कांस्य के रूप में प्राप्त किए तथा विश्व योगासन मंच पर अपनी श्रेष्ठता स्थापित की। विश्व योगासन चैंपियनशिप की यह सफलता केवल खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि योग भारत की सांस्कृतिक विरा सत होने के साथ-साथ एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी विकसित हो रहा है। आज अनेक देशों के युवा योगासन को खेल, फिटनेस और मानसिक विकास के माध्यम के रूप में अपना रहे हैं। इससे योग को भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में और अधिक स्थान मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हुई है। साथियों, आयुष मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा ‘योग 365’ अभियान इस वर्ष विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि योग केवल 21 जून का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्ष के सभी 365 दिनों की जीवनशैली होना चाहिए। यदि योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जाए तो मो टापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तनाव, अवसाद और अनिद्रा जैसी अनेक समस्याओं से बचाव संभव है। युवाओं के लिए “21 दिन, 21 मिनट” अभियान भी अत्यंत प्रेरणा दायक पहल सिद्ध हुआ है। मायभारत प्लेटफार्म के माध्य म से युवाओं को प्रतिदिन कम से कम 21 मिनट योग करने के लिए प्रेरित किया गया है। आज की डिजिटल दुनिया में जहां मोबाइल, सोशल मीडिया और प्रतिस्पर्धा के कारण तनाव बढ़ता जा रहा है, वहां योग मानसिक संतुलन और आत्म विश्वास का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। छात्रों के लिए योग केवल शारीरिक व्या याम नहीं, बल्कि एक मानसिक कवच है जो एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाता है।
साथियों, योग की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सार्वभौ मिकता है। यह किसी विशेष धर्मसंप्रदाय या विचारधारा से जुड़ा नहीं है।
योग मानव शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। यही कारण है कि आज अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्री का, आस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका सहित विश्व के लग भग सभी क्षेत्रों में योग को अपनाया जा रहा है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद तथा भारतीय मिशनों के मा ध्यम से 210 से अधिक देशों और क्षेत्रों में 2500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयो जित किए जा रहे हैं, जो इस की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण हैं। आज दुनिया जिस प्रकार जीवनशैली संबंधी रोगों, मानसिक तनाव, अकेलेपन और पर्यावरणीय चुनौतियों का साम ना कर रही है, उस परिस्थिति में योग एक समग्र समाधान प्रस्तुत करता है।
योग शरीर को शक्ति देता है, मन को स्थिरता देता है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। यही कारण है कि आधुनिक चिकि त्सा विशेषज्ञ भी योग को निवारक स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
साथियों, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह संदेश देता है कि स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और दवाओं से नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली से निर्मित होता है। यदि हम प्रतिदिन कुछ समय योग, प्राणायाम और ध्यान को दें, तो न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि हमारा समाज भी अधिक संतुलित, सकारात्मक और उत्पादक बनेगा।“उम्र का बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन स्वस्थ और आत्मनिर्भर रहकर जीना हमारी पसंद हो सकती है। ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि विश्व के करोड़ों बुजुर्गों को सम्मानजनक, सक्रिय और खुशहाल जीवन देने का वैश्विक अभियान है।”
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि मानवता के लिए स्वास्थ्य, शांति और संतुलन का महापर्व है। आइए हम संकल्प लें कि योग को केवल 21 जून तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि इसे अपने जीवन के प्रत्येक दिन का हिस्सा बनाएंगे। यही स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, स्वस्थ समाज और विकसित विश्व की सबसे मज बूत नींव है। आइए, योग को अपनाएं, स्वास्थ्य को प्राथमि कता दें और 365 दिन योग के साथ एक नए, ऊर्जावान, संतुलित और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं। यही अंतरराष्ट्रीय योगदिवस 2026 का वास्तविक संदेश है।
12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुखी जीवन के वैश्विक संकल्प के रूप में स्वीकार करने का प्रण करने का है शुभ अवसर
