एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तर पर वर्तमान डिजिटल युग में जहां एक ओर तकनीक ने ज्ञान, सूचना और अवसरों को वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक बनाया है,वहीं दूसरी ओर इसी तकनीक के दुरुपयोग ने परीक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ वर्षों में भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, डिजि टल हैकिंग, प्राक्सी कैंडिडेट्स कोचिंग-माफिया गठजोड़ और मेरिट के क्षरण जैसी घटनाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। भारत में नीट, रेलवे, राज्य लोक सेवा आयोगों और विभिन्न भर्ती बोर्डों की परीक्षाओं में सामने आए है मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि घोटालों ने यह स्पष्ट कर दिया कि पारंपरिक नियमों और ढांचा गत कमजोरियों के साथ आ धुनिक डिजिटल चुनौतियों का सामना करना अब संभव नहीं रह गया है। इसी पृष्ठ भूमि में संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए जो नोटिफिकेशन 4 फरवरी 2026 को जारी किया है, वह केवल एक सामान्य भर्ती विज्ञापन नहीं, बल्कि भारत की प्रशासनिक भर्ती प्रणाली में एक ऐतिहासिक संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
यह नोटिफिकेशन न केवल उम्मीदवारों के लिए नियमों में भारी परिवर्तन करता है, बल्कि यह स्पष्ट संकेत भी देता है कि आयोग अब मेरिट, अवसरों की समानता, नैतिकता और सेवा- प्रतिबद्धता को सर्वो च्च प्राथमिकता देने के लिए कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगा। यूपीएससी सीएसई -2026 के माध्यम से कुल 933 पदों पर भर्ती की जानी है, जिनमें से 33 पद बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। आनलाइन आवेदन प्रक्रिया 4 फरवरी 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और आवेदन की अंतिम तिथि 24 फरवरी 2026 नि र्धारित की गई है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट नचेब वदसपदम.दपब.पद के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
हालांकि, इस बार आवेदन भरना मात्र औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, क्योंकि नए नियमों की जटिलता और दीर्घकालिक प्रभाव को समझे बिना किया गया कोई भी निर्णय उम्मीदवार के पूरे करियर को प्रभावित कर सकता है।
साथियों बात अगर हम केवल एक अतिरिक्त मौका- सीरियल अटेम्प्ट’ संस्कृति पर निर्णायक प्रहार इस बदले हुए नियम को समझने की करें तो, नोटिफिकेशन का सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद प्राव धान यह है कि जो आईएएस आईएफएस उम्मीदवार सीएस ई -2025 या उससे पहले की परीक्षा के आधार पर किसी भी सिविल सेवा में चयनित या नियुक्त हो चुके हैं,उन्हें सीएसई-2026 या सीएसई -2027 में केवल एक बार और परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा। यह अवसर भी केवल उनके बचे हुए अटेम्प्ट्स के उपयोग तक सीमित रहेगा और इसके लिए उन्हें तत्काल सेवा से इस्तीफा देने की आव श्यकता नहीं होगी। यह नियम उस प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार है जिसमें उम्मीदवार एक सेवा प्राप्त करने के बाद भी बार -बार परीक्षा देकर “अपग्रेड सिंड्रोम” का शिकार बने रहते थे। इससे न केवल नए और पहली बार प्रयास करने वाले अभ्यर्थियों के अवसर सीमित होते थे,बल्कि प्रशासनिक ढांचे में भी अस्थिरता उत्पन्न होती थी। नए नियमों के अनुसार, जो उम्मीदवार पिछली परीक्षा ओं के परिणामस्वरूप भारतीय प्रशासनिक सेवा या भारतीय विदेश सेवा में नियुक्त हो चुके हैं और वर्तमान में उन सेवाओं के सदस्य हैं, वे सीएसई – 2026 में शामिल होने के लिए पूर्णतः अयोग्य होंगे।यह निर्णय वैश्विक प्रशासनिक प्रणालियों के अनुरूप है, जहां शीर्ष सेवाओं को एक करियर -फाइनल डेस्टिनेशन माना जाता है, न कि अस्थायी पड़ा व। इस प्रावधान का उद्देश्य स्पष्ट है आईएएस और आई एफएस को एक बार प्राप्त कर ने के बाद उसे “स्टेपिंग स्टोन” की तरह प्रयोग करने की मान सिकता को सटीक रूप से समाप्त करना।
साथियों बात अगर हम प्रीलिम्स क्लियर करने के बाद भी मेन्स का अवसर नहीं- समय आधारित निष्पक्षता इस को समझने की करें तो, यदि कोई उम्मीदवार सीएसई – 2026 की प्रारंभिक परीक्षा पास कर लेता है, लेकिन उसके बाद उसे पिछली परीक्षा के आधार पर आईएएस या आई एफएस में नियुक्ति मिल जाती है और वह उस सेवा का सद स्य बना रहता है, तो वह सी एसई-2026 की मुख्य परीक्षा में शामिल होने का पात्र नहीं रहेगा। यह नियम परीक्षा प्रक्रिया में टाइम-लाइन आ धारित निष्पक्षता को सुनिश् िचत करता है और “दो नावों में पैर रखने” की प्रवृत्ति को रोकता है। यदि कोई उम्मीद वार मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद लेकिन परिणाम घोषित होने से पहले आईएएस या आईएफएस में नियुक्त हो जाता है और सेवा में बना रहता है, तो उसे सीएसए -2026 के परिणाम के आधार पर किसी भी सेवा में नियुक्त नहीं किया जाएगा। यह नियम यह सुनि श्चित करता है कि कोई भी उम्मीदवार एक ही समय में दो अलग-अलग चयन प्रक्रियाओं का लाभ न उठा सके।
साथियों बात अगर हम हम आईपीएस के लिए ‘नो री – एंट्री’ नीति को समझने की करें तो नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि जो उम्मीद वार पिछली परीक्षा के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित या नियुक्त हो चुके हैं, वे सीएसई-2026 के परि णाम के आधार पर पुनः आई पीएस चुनने या उसमें शामिल होने के पात्र नहीं होंगे। यह नियम पुलिस नेतृत्व में निरंत रता, प्रशिक्षण निवेश की सुर क्षा और प्रशासनिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रेनिंग से केवल एक बार छूट- सेवा- प्रतिबद्धता का नया मानक-आईएएस, आईपीएस या किसी अन्य ग्रुप-। सेवा में चयनित उम्मीदवार सीएसई – 2027 में तभी शामिल हो सकते हैं जब उन्हें सीएसई -2026 के आधार पर अलाट की गई सेवा की ट्रेनिंग से केवल एक बार छूट दी गई हो। यह प्रावधान यह स्पष्ट करता है कि प्रशिक्षण अब औपचारिकता नहीं, बल्कि सेवा का अनिवार्य और सम्मान जनक हिस्सा है।
साथियों बात अगर हम ‘नो स्टेप-नो सर्विस’- फाउं डेशन कोर्स की अनिवार्यता को समझने की करें तो,नए नियमों के अनुसार, चयनित उम्मीदवार को फाउंडेशन कोर्स में शामिल होना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग में शामिल होता है और न ही विधिवत छूट प्राप्त करता है, तो उसकी सेवा आवंटन स्वतः रद्द कर दी जाएगी। यह प्रावधान प्रशास निक अनुशासन और संस्था गत संस्कृति को मजबूत कर ता है। यदि कोई उम्मीदवार सीएसई -2027 में चयनित होता है, तो वह या तो सीएसई -2026 या सीएसई -2027 में अलाट की गई सेवा में से एक का ही चयन कर सकता है। चयनित सेवा के अतिरिक्त अन्य सभी सेवा आवंटन स्वतः रद्द कर दिए जाएंगे। यह नियम उम्मीदवारों को स्पष्ट और जिम्मेदार निर्णय लेने के लिए बाध्य करता है। दोनों चयन रद्द होने की स्थिति- अंतिम चेतावनी-यदि उम्मीदवार न तो सीएसई -2026 और न ही सीएसई -2027 के आधार पर आवंटित सेवा की ट्रेनिंग में शामिल होता है, तो दोनों सेवाओं का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। यह प्रावधान यह दर्शाता है कि यूपीएससी अब अनिश्चितता और अनिर्णय को सहन करने के मूड में नहीं है।तीसरे प्रयास से पहले इस्तीफा अनिवार्य- करियर- फाइनलिटी की अवधारणा- नोटिफिकेशन का सबसे निर्णा यक नियम यह है कि जो उम्मीदवार पहले दो प्रयासों में चयनित हो चुके हैं, वे तीसरी बार परीक्षा नहीं दे सकते। यदि वे सीएसई -2028 या उसके बाद किसी परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना होगा। यह नियम सिविल सेवा को एक पूर्णकालिक प्रतिब द्ध करियर के रूप में स्थापित करता है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्य यन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारतीय प्रशासनिक प्रणाली का नया युग यूपीएससी सीएसई – 2026 का यह नोटि फिकेशन केवल नियमों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक भर्ती प्रणाली के नैतिक पुनर्गठन का दस्तावेज है। यह डिजिटल युग की चुनौतियों, अवसरों की समानता, प्रशिक्षण निवेश, सेवा- गरिमा और युवा प्रति भाओं के लिए न्यायसंगत मंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक साहसिक कदम है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो यह सुधार भारत को उन देशों की श्रेणी में खड़ा करता है जहां सिविल सेवा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्तरदायित्व माना जाता है।
जो उम्मीदवार 24 फरवरी 2026 तक आवेदन करने जा रहे हैं, उनके लिए यह अनिवार्य है कि वे इस नोटिफिकेशन को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि समझें, विश्लेषण करें और दीर्घकालिक रणनीति के साथ निर्णय लें, क्योंकि अब यूपीएससी में सफलता केवल परीक्षा पास करने का नाम नहीं, बल्कि स्पष्ट दृष्टि, नैतिक प्रतिबद्धता और सेवा-समर्पण की परीक्षा भी बन चुकी है।
आईएएस और आईएफएस को स्टेपिंग स्टोन की तरह प्रयोग करने व अपग्रेड सिंड्रोम प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार – सीरियल अटेम्प्ट संस्कृति पर निर्णायक प्रहार सराहनीय कदम
