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नवजात के जीवन का पहला मिनट अहम

(राममिलन शर्मा)
लखनऊ। नवजात शिशु के जन्म के बाद का पहला एक मिनट उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। जन्म के तुरंत बाद यदि किसी शिशु को सांस लेने में परेशानी होती है, तो प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा समय पर पुनर्जीवन देकर उसकी जान बचाई जा सकती है। यह बात शनिवार को जनपद के एक होटल में आयोजित नवजात शिशु पुनर्जीवन (छमव दंजंस त्मेनेबपजंजपवद) विषयक प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्य क्रम में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. उत्कर्ष बंसल ने कही।
यह कार्यक्रम लखनऊ बाल रोग अकादमी द्वारा आयोजित नेशनल रीससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी) के अंतर्गत ट्रेनर आफ ट्रेनर्स के रूप में आयो जित किया गया था। डा. उत् कर्ष बंसल इस कार्यक्रम के संयोजक भी हैं। डा. उत्कर्ष ने बताया कि भारत में बाल एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए भारतीय बाल रोग अकादमी निरंतर प्रया सरत है। कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक डा. अभिषेक बंसल ने बताया कि सौ में से लगभग 85 नवजात शिशु जन्म के बाद बिना किसी परेशानी के बाहरी दुनिया में समायोजित हो जाते हैं, लेकिन करीब 15 प्रतिशत शिशुओं को चिकि त्सकीय सहायता की आवश्य कता होती है।
प्रशिक्षण सत्र में बाल रोग विशेषज्ञ डा. सलमान खान ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण भारतीय बाल रोग अकादमी (आईएपी) द्वारा संचा लित किए जाते हैं, जिसमें प्रतिभागियों को कृत्रिम वाता वरण में पुतलों (मैनिकिन) पर नवजात पुनर्जीवन की प्रक्रिया सिखाई जाती है। बार-बार अभ्यास कर दक्षता विकसित की जाती है, जिसका मूल्यां कन अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा किया जाता है। इस कार्यशाला में डा. एकांश राठौड़िया, डा. अमित रस्तोगी, डा. आशीष वर्मा और डा. परमिंदर सिंह ने प्रशिक्षक की भूमिका निभाई।
प्रतिभागी बाल रोग विशेषज्ञ डा. एकांश राठौड़िया ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने में सहायक सिद्ध होंगी। लखनऊ बाल रोग अका दमी के अध्यक्ष डा. अमित रस् तोगी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन बार- बार और प्रदेश के प्रत्येक जिले में किया जाना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान डा. आशीष वर्मा ने प्रतिभागियों से अपील की कि वे इस प्रशि क्षण में प्राप्त ज्ञान का व्यवहा रिक उपयोग कर अधिक से अधिक नवजात शिशुओं की जान बचाने में योगदान दें।
डा. अमित ने कहा कि लखनऊ बाल रोग अकादमी इस तरह के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का निरंतर आयो जन करती रहेगी। कार्यशाला में लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर और अमेठी से आए 45 बाल रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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