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बजट 2026-27 से आम जनता को सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और समावेशी आर्थिक भविष्य की उम्मीद

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तर पर भारत विजन 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, जहाँ देश को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर एक समृद्ध, समावेशी, नवोन्मेषी और मानवीय मूल्यों से युक्त वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया गया है। इस यात्रा में हर वार्षिक बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजि क दिशा- सूचक और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का दर्पण होता है। 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत होने वाला केंद्रीय बजट इसी अर्थ में अत्यंत निर्णायक है, बजट 2026-27 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और वित्त मंत्रालय के गलियारों में हलचल तेज हो गई है उम्मीद है बजट 2026 2027 में भी सरकार अपने विकास के मंत्र पर कायम रहेगी, इसका मतलब है, पूंजीगत व्यय अर्थव्यवस्था का इंजन बना रहेगा।
हालांकि यह भी उम्मीद है कि वित्तमंत्री का एक हाथ विकास की डोर थामेगा तो दूसरा राजकोषीय घाटे की लगाम कसेगा, क्योंकि यह मध् यम वर्ग, युवाओं, श्रमिकों, किसानों, उद्योगों और स्वास्थ्य – शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाते हुए अगले दशक की नींव रख सकता है। बजट 2026 से अपेक्षा है कि वह विकास कल्याण के भारतीय माडल को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूती दे।संभावित 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किए जाने की पूरी संभावना है, हालांकि इस दिन रविवार और गुरु रविदास जयंती होने के कारण तारीख बदलने या इसपर संसदीय समिति द्वारा विचार करने की अटकलें चल रही हैं, लेकिन मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि परंपरा को बनाए रखने के लिए 1 फरवरी की संभाव ना अधिक है और इस बार शेयर बाजार भी खुल सकता है। सरकार ने आगामी बजट के लिए जनता से 16 जनवरी 2026 तक सुझाव मांगे हैं, जिसमें सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। यह पहल नाग रिकों को बजट निर्माण प्रक्रिया में भाग लेने और अपनी अपेक्षा ओं को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है।
सरकार का उद्देश्य समावे शी विकास को बढ़ावा देना है, जिसके लिए जनता से मिले सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। इससे पहले पिछले महीने, केंद्रीय वित्त और कार पोरेट मामलों की मंत्री ने आगामी केंद्रीय बजट 2026 -27 की तैयारियों के तहत नई दिल्ली में पूर्व- बजट परामर्श के कई दौर पूरे किए। इस शृंखला की शुरुआत प्रमुख अर्थशास् ित्रयों के साथ परामर्श से हुई। इसके बाद किसान संघों के प्रतिनिधियों और कृषि अर्थशा स्त्रियों व बाद के सत्रों में एम एसएमई, पूंजी बाजार, स्टार्ट अप, विनिर्माण, बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा), सूचना प्रौद्योगिकी, पर्य टन और आतिथ्य क्षेत्र, और अंत में ट्रेड यूनियन और श्रमिक संगठनों के हितधारकों सहित करीब 13 से अधिक बैठकें की गई है व उनके साथ परामर्श किया गया। साथियों बात अ गर हम विजन 2047 और बद लती राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ इस को समझने की करें तो, विजन 2047 का मूल दर्शन केवल जीडीपी वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव विकास सूच कांक, जीवन की गुणवत्ता, सामाजिक न्याय और सतत विकास को केंद्र में रखता है। वैश्विक अनुभव बताता है कि जो देश दीर्घकालिक रूप से सफल हुए, उन्होंने शिक्षा, स्वा स्थ्य और रोजगार को समानां तर रूप से सुदृढ़ किया। बजट 2026 को इसी समग्र दृष्टि से देखा जा रहा है, जहाँ आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति तक पहुँचे, और मध्यम वर्ग पर बढ़ते दबाव को सख्ती से कम किया जाए।
साथियों बात अगर हम बजट 2026 में सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज और मध्यम वर्ग के लिए रोजगार पर विशेष ध्यान की आवश्यकता को सम झने की करें तो, मध्यम वर्ग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ -भारतीय मध्यम वर्ग न केवल उपभोक्ता मांग का प्रमुख स्रोत है,बल्कि कर आधार, उद्यमिता और सामाजिक स्थिरता की रीढ़ भी है। पिछले कुछ वर्षों में महँगाई, शिक्षा शुल्क, स्वा स्थ्य खर्च और आवास लागत में वृद्धि ने मध्यम वर्ग पर अति रिक्त बोझ डाला है। बजट 2026 से अपेक्षा है कि वह इस वर्ग को राहत देने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों उपाय करे जैसे कर संरचना में सुधार, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार और कौशल-आ धारित रोजगार सृजन।
सस्ती शिक्षा-मानव पूंजी में दीर्घकालिक निवेश विक सित देशों का अनुभव बताता है कि शिक्षा पर किया गया निवेश सबसे अधिक सामाजि क प्रतिफल देता है। भारत में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा की लागत तेजी से बढ़ी है। बजट 2026 में सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों की क्षमता बढ़ाने, डिजिटल और हाइब्रिड लर्निंग को सस्ता बनाने, छात्र वृत्ति और शिक्षा ऋण पर ब्याज सब्सिडी जैसी पहलों की आव श्यकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिनलैंड, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने सस्ती या लगभग मुफ्त उच्च शिक्षा के माध्यम से नवाचार और उत्पादकता को बढ़ाया,भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ सकता है। सस्ता इलाज- स्वास्थ्य सुरक्षा से आर्थिक सुर क्षा तक स्वास्थ्य खर्च भारत में गरीबी के प्रमुख कारणों में से एक है। मध्यम वर्ग अक्सर बीमा कवरेज के बावजूद उच्च आउट- आफ- पाकेट खर्च झेलता है। बजट 2026 में सार्व जनिक स्वास्थ्य ढांचे को मज बूत करने, जिला स्तर पर उन् नत अस्पताल, जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार पर जोर आवश्यक है। सस्ता इलाज केवल मानवीय आवश्य कता नहीं, बल्कि आर्थिक उत् पादकता बढ़ाने का साधन भी है। रोजगार सृजन- युवाओं की आकांक्षाओं का उत्तरभारत की जनसांख्यिकीय संरचना युवा है, और रोजगार सृजन सबसे बड़ी चुनौती।
बजट 2026 में श्रम-गहन क्षेत्रों, स्टार्ट अप्स, एमएसएमई और ग्रीन जाब्स को बढ़ावा देकर टिकाऊ रोजगार पैदा किए जा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव दर्शाता है कि कौशल प्रशिक्षण को उद्योग की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर ही रोजगार टिकाऊ बनता है।
साथियों बात अगर हम कैंसर जैसी भयंकर बीमारी पर रोकथाम के लिए राष्ट्रीय रोडमैप की अनिवार्यता को समझने की करें तो, कैंसर- स्वास्थ्य ही नहीं, सामाजिक -आर्थिक संकट-कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियाँ भारत में तेजी से बढ़ रही हैं।
यह केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिरता, कार्यबल की उत्पाद कता और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव डालती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कैंसर रोक थाम को प्राथमिक सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश माना है।
रोकथाम केंद्रित दृष्टि कोण- इलाज से पहले सुरक्षा वैश्विक अनुभव बताता है कि कैंसर के लगभग 30-40 प्रति शत मामलों को जीवनशैली, पर्यावरणीय नियंत्रण और प्रारं भिक जांच से रोका जा सकता है। बजट 2026 में तंबाकू नियं त्रण, प्रदूषण कम करने, पोषण सुधार और नियमित स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के लिए समर्पित फंडिंग आवश्यक है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कैंसर स्क्री निंग से जोड़ना एक प्रभावी कदम हो सकता है।
सस्ती जांच और इलाज -समानता का प्रश्न, कैंसर का इलाज अत्यंत महँगा है। बजट में सार्वजनिक- निजी भागी दारी के माध्यम से सस्ती जांच, रेडियोथेरेपी और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का रोडमैप आना चाहिए। जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं को प्रोत् साहन देकर लागत घटाई जा सकती है।
अनुसंधान और डेटा- आ धारित नीतिअंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैंसर रजिस्ट्रियों और डेटा एनालिटिक्स ने नीति निर्माण को सशक्त बनाया है। भारत में भी राष्ट्रीय कैंसर डेटा नेट वर्क और स्वदेशी अनुसंधान को बजट समर्थन मिलना चाहिए, ताकि भारतीय संदर्भ में प्रभावी समाधान विकसित हों। साथियों बात अगर हम आयकर विभाग की 13 से अधिक वर्गों से प्री-बजट कंस ल्टेशन- सुझावों का विस्तृत विश्लेषण करने की करें तो,समावेशी नीति निर्माण की पहल-आयकर विभाग द्वारा 13 से अधिक विभिन्न वर्गों उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, वेतनभोगी, वरिष्ठ नागरिक, कृषि-आधारित उद्यम, वित्तीय क्षेत्र, कर पेशेवर, निर्यातक, सामाजिक क्षेत्र और शिक्षावि दों, से प्री-बजट परामर्श एक लोकतांत्रिक और समावेशी पहल है। इसका उद्देश्य जमीनी अनुभवों को नीति में शामिल करना है। उद्योग और एमएस एमई के सुझाव-उद्योग जगत ने कर सरलीकरण, अनुपालन लागत में कमी और निवेश प्रोत्साहन की मांग की। एम एस एमई ने आसान क्रेडिट, कर विवादों के शीघ्र निपटान और डिजिटल अनुपालन में सहायता पर जोर दिया। स्टा र्टअप और नवाचार क्षेत्र स्टार्ट अप्स ने कर प्रोत्साहन की निरं तरता, एंजेल टैक्स जैसी जटि लताओं से राहत और अनुसं धान पर टैक्स क्रेडिट का सुझाव दिया।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए यह महत्वपूर्ण माना गया। वेतनभोगी और वरिष्ठ नागरिक-वेतनभोगी वर्ग ने आयकर स्लैब में राहत, मानक कटौती बढ़ाने और महँ गाई के अनुरूप कर ढांचे को समायोजित करने की मांग की। वरिष्ठ नागरिकों ने स्वास् थ्य खर्च पर अतिरिक्त कर छूट और सरल रिटर्न प्रक्रिया का सुझाव दिया।सामाजिक और शिक्षा क्षेत्र तथा सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों ने शिक्षा -स्वास्थ्य पर कर प्रोत्सा हन, परोपकारी दान को बढ़ावा और मानव विकास को कर नीति से जोड़ने की बात कही।
साथियों बात अगर हम 1 फरवरी 2026 के बजट में संभा वित प्रस्ताव- एक अग्रिम दृष्टि इसको समझने की करें तो, कर सुधार और मध्यम वर्ग राहत -संभावना है कि बजट 2026 में आयकर स्लैब में युक्तिसंगत बदलाव, मानक कटौती में वृद्धि और अनुपालन को और सरल किया जाएगा। अप्रत्यक्ष करों में स्थिरता बनाए रखते हुए उपभोक्ता मांग को प्रोत्साहन मिल सकता है। शिक्षा और कौशल पर बढ़ा आवंटन-डिजि टल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन और कौशल भारत मिशन के विस्तार के लिए अतिरिक्त संसाधन संभा वित हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एक्सचेंज प्रोग्राम्स को भी बढ़ावा मिल सकता है।
स्वास्थ्य और कैंसर रोड मैप-सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि, कैंसर रोकथाम और उपचार के लिए राष्ट्रीय मिशन, और हेल्थ-टेक नवाचार को समर्थन संभावित प्रस्तावों में शामिल हो सकते हैं।रोजगार और ग्रीन ग्रोथ ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, जलवायु अनुकूल कृषि और शहरी अव संरचना में निवेश से नए रोज गार अवसर सृजित हो सकते हैं। यह भारत को वैश्विक जल वायु नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि संभावित बजट 2026-27 आर्थिक दस्तावेज से सामाजिक अनुबंध तक, बजट 2026-27 केवल आंक ड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत और उसके नागरिकों के बीच एक नए सामाजिक अनुबंध की तरह देखा जा रहा है।
सस्ती शिक्षा, सस्ता इलाज, रोजगार सृजन, कैंसर जैसी बीमारियों पर रोकथाम और समावेशी कर नीति, ये सभी मिलकर विजन 2047 को साकार करने की आधारशिला रख सकते हैं।
यदि बजट 2026-27 मान वीय दृष्टि, आर्थिक विवेक और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का संतु लन साध पाया, तो यह भारत को न केवल आर्थिक महा शक्ति, बल्कि एक संवेदनशील और न्यायपूर्ण समाज के रूप में भी स्थापित करेगा।

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