(राममिलन शर्मा)
अमेठी। “मैंने पिछले साल फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल का प्रशिक्षण लिया था और मुझे रुग्णता प्रबंधन और दिव्यांगता उपचार (एम एमडीपी) किट मिली थी। मैंने एक साल तक अपने अंगों की देखभाल और नियमित व्या याम किया। अब मेरी सूजन पहले की अपेक्षा आधी रह गई है।” यह कहना है मुसा फिरखाना ब्लॉक के अनखरा गांव की निवासी, पेशेंट स्टेक होल्डर प्लेटफार्म की सदस्य 55 वर्षीय उर्मिला का। उन्होंने यह बातें मंगलवार को आयुष् मान आरोग्य मंदिर, अनखरा में आयोजित एमएमडीपी प्रशि क्षण के अवसर पर कहीं।
उर्मिला पिछले 15 सालों से फाइलेरिया से पीड़ित हैं। उन्हें तीसरी श्रेणी की सूजन थी, जो नियमित देखभाल और व्यायाम के बाद अब दूसरी श्रेणी की हो गई है।
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूल न कार्यक्रम के तहत आयोजि त प्रशिक्षण कार्यक्रम में फाइले रिया बीमारी, इसके लक्षण, बचाव, प्रभावित अंग की देख भाल एवं साफ-सफाई तथा व्यायाम के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही 25 फाइलेरिया रोगियों को एमएम डीपी किट वितरित की गईं। एमएमडीपी किट में बाल्टी, साबुन, तौलिया आदि चीजें शामिल थीं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल ते हुए बेसिक हेल्थ वर्कर दुर्गेश ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है, जो संक्र मित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है। इसके लक्षण मच्छर के काटने के 5 से 10 साल बाद दिखाई दे सकते हैं। यह शरीर के लट कने वाले अंगों जैसे हाथ, पैर, महिलाओं के स्तन और पुरुषों के अंडकोष को प्रभा वित करता है। इसके साथ ही काइलूरिया (धातु रोग) और ट्रापिकल स्नोफिलिया भी इस के लक्षणों में शामिल हैं। इस बीमारी से बचाव के लिए मच्छर दानी का प्रयोग करना चाहिए और सर्वजन दवा सेवन (एम डीए) अभियान के तहत साल में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा जरूर खानी चाहिए।
प्रभावित अंगों की साफ- सफाई के बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) ने बताया कि फाइलेरिया प्रभा वित अंगों की दिन में दो बार, सुबह और शाम, साफ-सफाई करनी चाहिए। इससे किसी भी प्रकार के बाह्य संक्रमण का खतरा नहीं होगा और एक्यूट अटैक का खतरा भी कम होगा। इसके साथ ही नियमित देखभाल से सूजन में धीरे-धीरे कमी आएगी। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान व्यायाम करके भी दिखाया।
सीएचओ ने बताया कि जब कभी एक्यूट अटैक आए तो व्यायाम नहीं करना चा हिए। ऐसी स्थिति में सूती कपड़े को पानी में भिगोकर प्रभावित अंग के चारों तरफ कई बार लपेटना चाहिए, जिस से जलन कम होगी। जब तक तबीयत खराब हो, तब तक व्यायाम बंद रखना चाहिए और ठीक होने के बाद दो बारा व्यायाम शुरू करना चा हिए। उन्होंने बताया कि निय मित देखभाल और सही तरी के से व्यायाम करने से सूजन को कम किया जा सकता है। उन्होंने फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए एमएमडीपी किट का नियमित उपयोग करने की सलाह दी।
इस अवसर पर आशा कार्यकर्ता, कोटेदार, स्वास्थ्य सखी, प्रधान प्रतिनिधि और सहयोगी संस्था सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
एमएमडीपी प्रशिक्षण कार्यक्रम में फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल का मिला हुनर
