एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट)ं
वैश्विक स्तरपर इक्कीसवीं सदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व तकनीकी गति, डिजिटल वित्तीय व्यवस्था और सीमाहीन व्यापार की सुविधा एं दी हैं, लेकिन इसी परिवर्तन ने आर्थिक अपराधों को भी पहले की तुलना में अधिक ज टिल, संगठित और अंतरराष् ट्रीय बना दिया है। आज धन की अवैध आवाजाही केवल नकदी या पारंपरिक बैंक खातों तक सीमित नहीं है,बल्कि भुगतान मंचों, डिजिटल मा ध्यमों, मुखौटा कंपनियों जटिल व्यावसायिक संरचनाओं और सीमा-पार लेन-देन के माध्यम से अपराध की नई अर्थव् यवस्था तैयार हो रही है।
भारत जैसे तेजी से विक सित होते देश में, जहां डिजि टल भुगतान, अवसंरचना नि र्माण और वित्तीय गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, वहां आ र्थिक पारदर्शिता और सार्वज निक धन की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बताना चाहूंगा कि मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, इसी व्यापक संदर्भ में 2 सितंबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई दो महत्वपूर्ण बहु-क्षेत्रीय तलाशी कार्रवाइयां विशेष महत्व रख ती हैं। एक ओर साइप्रस- आ धारित आनलाइन सट्टेबाजी मंच परिमैच से जुड़े कथित द्दनशोधन नेटवर्क की जांच के तहत महाराष्ट्र, दिल्ली -एनसीआर, राजस्थान और गुजरात में 12 स्थानों पर तलाशी ली गई,जबकि दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधि करण के टोल प्लाजा से संब ंधित कथित वित्तीय धोखा धड़ी की जांच में सात क्षेत्रों में 14 परिसरों को निशाना बनाया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात इस रैकेट में भुगतान एग्रीगेटर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट वकील और कंपनी सेक्रेटरीकी भूमिका सबसे प्रमुख बनकर उभरी है। ये पेशेवर, जिन्हें वित्तीय प्रणालियों का संरक्षक माना जाता है, शेल कंपनियों के निर्माण और उनके माध्यम से फंड को डायवर्ट करने के मुख्य सूत्रधार पाए संभावना व्यक्ति की गई है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटी एफ) जो मनी लाॅन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली एक वैश्विक संस्था है, ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वकील, सीए और पेशेवर एकाउंटेंट अक् सर अनजाने में या जानबूझ कर मनी लान्ड्रर्स के लिए गेट कीपर के रूप में कार्य करते हैं।जब कोई सीए या कंपनी सेक्रेटरी किसी फर्जी पते पर कंपनी का पंजीकरण करता है और उसके माध्यम से करो ड़ों रुपये का लेन-देन दिखा ता है, तो वह देश की पूरी वित्तीय सुरक्षा प्रणाली को सटीकता से पंगु बना देता है।
साथियों बात अगर हम एनएचएआई टोल प्लाजा माम ला राष्ट्रीय अवसंरचना में तक नीकी धोखाधड़ी की गंभीर चुनौती इसको समझने की करें तो, इस राष्ट्रव्यापी जांच का एक महत्वपूर्ण आयाम राष् ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के टोल प्लाजा से जुड़ी कथित वित्तीयधोखाधड़ी है।
प्रवर्तन निदेशालय ने 2 सितंबर को उत्तर प्रदेश, राज स्थान, महाराष्ट्र, जम्मू- कश् मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली- एन सीआर और पश्चिम बंगाल में 14 परिसरों पर तलाशी ली। जांच का केंद्र कथित रूप से ऐसे अनधिकृत साफ्टवेयर का इस्तेमाल है, जिनके माध्यम से वैध टोल रसीदों के समान रसीदें तैयार कर संग्रहित राशि कोआधिकारिक लेखा प्रणाली से बाहर मोड़ने की आशंका सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, फोरेंसिक जांच और एनएचएआई के अभिलेखों से ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। अब जांच का उद्देश्य डिजिटल और दस् तावेजी साक्ष्य जुटाना, कथित लाभार्थियों की पहचान करना तथा अपराध से प्राप्त धन की वास्तविक दिशा का पता लगा ना है। यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि राष्ट्रीय राज मार्ग केवल सड़कें नहीं, बल्कि देश की आर्थिक जीवनरेखा हैं। टोल व्यवस्था से प्राप्त प्रत्येक राशि सार्वजनिक अव संरचना, रखरखाव और याता यात व्यवस्था से जुड़ी होती है।यदि तकनीकी माध्यमों का दुरुपयोग करके सार्वजनिक राजस्व को आधिकारिक लेखा प्रणाली से बाहर किया जाता है, तो नुकसान केवल सरका री खजाने तक सीमित नहीं रहता। इससे डिजिटल शासन, सार्वजनिक संस्थाओं की विश् वसनीयता और नागरिकों के विश्वास पर भी असर पड़ता है। आधुनिक वित्तीय अपराद्द की यही विशेषता है कि अपरा धी अब केवल व्यवस्था की कमजोरी तलाशते नहीं, बल्कि तकनीक को ही अपराध का साधन बना लेते हैं।
साथियों बात अगर हम परिमैच मामला – आनलाइन सट्टेबाजी से सीमा-पार धन के कथित नेटवर्क तक को समझने की करें तो,2 सितंबर की दूसरी बड़ी कार्रवाई साइ प्रस-आधारित आनलाइन सट्टेबाजी मंच परिमैच और उससे जुड़े कथित वित्तीय नेटवर्क पर केंद्रित रही। प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र में पांच, दिल्ली-एनसीआर में चार, राजस्थान में दो और गुजरात में एक स्थान पर तलाशी ली।
छापेमारी सीधे तौर पर उन सफेदपोश अपराधियों (वाइट-कालर क्रिमिनल्स) पर लक्षित थी, जो इस अवैध द्दन को वैध बनाने के तंत्र का संचा लन कर रहे थे। इस रैकेट में भुगतान एग्रीगेटर्स (पेमेंट कम्पनीज) चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) की भूमिका सबसे प्रमुख बनकर उभरी है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में भीतरघात – पेमेंट एग्रीगेटर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के उस गठजोड़ का सच जिसने ईडी को हिला दिया। ये पेशे वर, जिन्हें वित्तीय प्रणालियों का संरक्षक माना जाता है, शेल कंपनियों के निर्माण और उनके माध्यम से फंड को डायवर्ट करने के मुख्य सूत्र धार पाए गए। मीडिया के अनु सार, कुछ भुगतान कंपनियों पर सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को नकदी में बदलने तथा कुछ पेशेवरों पर अवैध धन प्रेषण और कथित फर्जी विदे शी प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से रकम को विदेश भेजने में सहायता करने का आरोप है। इस मामले का सबसे चिंताज नक पहलू इसकी कथित बहु -स्तरीय वित्तीय संरचना है। यदि अपराध से प्राप्त धन पहले देश के भीतर कई खातों और संस्थाओं के बीच घुमाया जाए और उसके बाद अलग- अलग वित्तीय माध्यमों के जरिए विदेश भेजा जाए, तो जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना अत्यंत कठिन हो जाता है। यही वह प्रक्रिया है जिसे सामान्यतः धन की परत-दर- परत आवाजाही कहा जाता है। परिमैच मामले में प्रवर्तन निदेशालय की पिछली कार्र वाई के दौरान लगभग 112 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज किए जाने की रिपोर्ट भी सटी कता से सामने आई है।
साथियों बात अगर हम बहु- राज्यीय और बहु-स्त रीय जांच का रणनीतिक महत्व को समझने की करें तो, 2 सितंबर 2026 की दोनों कार्र वाइयों का सबसे बड़ा महत्व उनकी भौगोलिक व्यापकता और वित्तीय अपराध की बद लती प्रकृति को समझने में है। परिमैच जांच में चार राज्यों और दिल्ली-एनसीआर के 12 स्थानों को निशाना बनाया गया, जबकि एनएचएआई मा मले में सात क्षेत्रों के 14 परि सरों पर तलाशी हुई। इसका अर्थ यह है कि जांच अब कि सी एक शहर, बैंक खाते या कंपनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि धन के स्रोत, उसके मध्यवर्ती ठिकानों, तकनीकी साधनों और संभावित अंतिम लाभार्थियों को एक साथ जोड़कर देखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आर्थिक अप राधों के विरुद्ध आधुनिक जांच की सफलता इसी बात पर निर्भर करती है कि जांच एजेंसियां केवल यह न देखें कि पैसा कहां जमा हुआ, बल्कि यह भी पता लगाएं कि पैसा कहां से आया, किन संस्थाओं से होकर गुजरा, किस तकनी की माध्यम का इस्तेमाल हुआ और अंततः उसका लाभ किसे मिला। इस दृष्टि से बहु-रा ज्यीय तलाशी केवल छापेमा री नहीं, बल्कि धन की पूरी यात्रा को पुनर्निर्मित करने का प्रयास है। साथियों बात कर हम वित्तीय पेशेवर और भुगतान प्रणाली – व्यवस्था के द्वारपाल की जिम्मेदारी इसको समझने की करें तो, परिमैच मामले ने वित्तीय पेशेवरों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। भुगतान कंपनियां, भुगतान द्वार,चार्टर्ड लेखाकार और कंपनी सचिव आधुनिक वि त्तीय व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं। इन संस्थाओं और पेशे वरों की विशाल बहुमत की भूमिका वैध और आवश्यक हैय इसलिए किसी जांच में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी मानना उचित नहीं होगा। अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही निर्धा रित होगी। लेकिन यदि कोई पेशेवर जानबूझकर फर्जी कंप नियों, संदिग्ध लेन-देन या अवैध धन के स्थानांतरण को आसान बनाता है, तो उसकी भूमिका पूरे वित्तीय सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सक ती है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने भी इस जोखिम को लंबे समय से रेखांकित किया है। उसके अनुसार वकील, लेखाकार, कंपनी और न्यास सेवा प्रदाता जैसे पेशेवर वि त्तीय व्यवस्था के ‘द्वारपाल’ बन सकते हैं और अपराधियों द्वारा अनजाने या जानबूझकर दुरुप योग किए जा सकते हैं।
2024 की वित्तीय कार्रवा ई कार्य बल समीक्षा ने भी इस बात पर जोर दिया कि ऐसे पेशेवरों के लिए प्रभावी द्दनशोधन-विरोधी व्यवस्थाएं आवश्यक हैं। इसलिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा केवल बैंकों और जांच एजेंसियों की जिम् मेदारी नहीं हो सकती। भुग तान कंपनियों, लेखाकारों, कंपनी सचिवों, बैंकों, तकनी की मंचों और नियामक संस्था ओं के बीच मजबूत सूचना- साझा करण व्यवस्था विकसि त करना आवश्यक होगा। वि त्तीय कार्रवाई कार्य बल ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग को भी आर्थिक अपराध के विरुद्ध वैश्विक सुर क्षा मजबूत करने का महत्व पूर्ण सटीक आधार माना है।
साथियों बात अगर हम डिजिटल अर्थव्यवस्था में तक नीक विकास का माध्यम भी, अपराध का हथियार भी, इस को समझने की करें तो, एनएच एआई और परिमैच मामलों के बीच एक महत्वपूर्ण समानता दिखाई देती है तकनीक और वित्तीय प्रणालियों का कथित दुरुपयोग। एक मामले में अन धिकृत सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोल संग्रह व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में भुग तान प्रणालियों और वित्तीय माध्यमों के जरिए कथित सट्टे बाजी धन को इधर-उधर करने की जांच हो रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था जित नी तेजी से विकसित होगी, साइबर और वित्तीय अपराधों की निगरानी उतनी ही उन्नत करनी होगी। भारत के लिए चुनौती दोहरी है। एक तरफ डिजिटल भुगतान और तकनी की नवाचार को बढ़ावा देना है, दूसरी तरफ उसी तकनीक के दुरुपयोग को रोकना है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वित्तीय निगरानी, संदिग्ध लेन-देन की वास्तविक समय में पहचान लाभार्थी स्वा मित्व की पारदर्शिता और मज बूत डिजिटल लेखा-परीक्षण जैसी व्यवस्थाओं को सटीकता से लगातार विकसित करना होगा। साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत की वित्तीय सुर क्षा का अगले चरण को समझ ने की करें तो, 2 सितंबर 2026 की कार्रवाई को केवल प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के रूप में देखना इसके व्यापक महत्व को सीमित कर देगा। यह कार्रवाई उस वैश्विक चुनौ ती की ओर संकेत करती है जिसमें अवैध सट्टेबाजी, धन शोधन, मुखौटा कंपनियां, सीमा – पार धन हस्तांतरण और तकनीकी धोखाधड़ी एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। वित्तीय कार्र वाई कार्य बल लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि अपराधियों को वित्तीय व्यवस् था तक पहुंच देने वाले द्वारपा लों की निगरानी, वास्तविक लाभार्थियों की पहचान और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ रही है और वैश्विक निवेश तथा डिजिटल वित्तीय गति विधियों में उसकी भूमिका भी व्यापक हो रही है। ऐसे समय में आर्थिक अपराध के विरुद्ध कठोर और पारदर्शी कार्रवाई केवल राजस्व की रक्षा का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक संप्रभुता और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रश्न भी है। एन एचएआई जैसे सार्वजनिक अव संरचना तंत्र में कथित धोखा धड़ी हो या आनलाइन सट्टेबा जी से जुड़े कथित सीमा-पार धन नेटवर्क, दोनों यह संदेश देते हैं कि आधुनिक अपराध की सीमा अब भौगोलिक नहीं रही है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि 2 सितंबर 2026 की प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाइयां भारत के सामने एक बड़ा नीति-संदेश रखती हैं, डिजिटल भारत को सुरक्षि त भारत बनाने के लिए केवल तकनीक पर्याप्त नहीं है,बल्कि तकनीक के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, मजबूत वित्तीय निग रानी और अंतरराष्ट्रीय सह योग भी आवश्यक है।
यदि सार्वजनिक राजस्व, डिजिटल भुगतान और अंतर राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह को अप राधी नेटवर्क से सुरक्षित रखना है, तो जांच एजेंसियों,वित्तीय संस्थाओं, तकनीकी कंपनियों और जिम्मेदार पेशेवरों के बीच सहयोग को और मजबूत कर ना होगा। आर्थिक अपराध के विरुद्ध असली सफलता केवल छापेमारी या संपत्ति जब्ती में नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को मजबूत करने में होगी जिस में अवैध धन पैदा ही न हो, छिप न सके और सीमा पार जाकर सुरक्षित आश्रय न पा सके। यही भारत की उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था की वि त्तीय सुरक्षा का अगला निर्णा यक अध्याय हो सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में वित्तीय अपराधों की बदलती प्रकृति और प्रवर्तन निदेशालय ;ईडीद्ध की बहु-राज्यीय कार्रवाई – एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
