(विशाल राजपूत)
आबादी का एक बहुत ब ड़ा हिस्सा कभी न कभी नींद की गड़बड़ी से परेशान हो ता है और नींद है भी अजीब चीज, जिसे ज्यादा आये वह भी परेशान और जिसे न आये वह भी परेशान। सवाल अक्स र लोगों के मन में उठता है। नींद के बारे में कुछ तथ्य जो आपको मालुम होने चाहिए।
एक सामान्य वयस्क को छह से आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है। बच्चों को नींद की आवश्यकता अद्दि क रहती है और वह जितना ज्यादा सोएं उतना ही अच्छा। नींद के समय शरीर की ऊर्जा का खर्च पच्चीस प्रतिशत तक घट जाता है। जिससे शरीर को अपने टूटे फूटे हिस्सों को दुरूस्त करने में मदद मिलती है, वहीं दिमाग के खर्च हुए र सायनों को दोबारा संचित करने का मौका मिलता है।
नींद में गड़बड़ी – जरू रत पड़ने पर कुछ दिनों तक कम सो कर भी काम चलाया जा सकता है, पर लम्बे समय तक नींद की कमी तकलीफ देह हो जाती है। लम्बे समय तक बने रहने वाला तनाव या उदासी का मर्ज या फिर कुछ और मानसिक बीमारि यों में भी नींद का आना एक प्रमुख लक्षण होता है। यह एक गलत धारणा है कि भाँग या शराब आदि के नशे नींद लाने में सहायक होते हैं, हकीकत यह है कि इस तरह के नशे नींद में गड़बड़ी ही पैदा करते हैं।
समाधान – दिन में ज्यादा देर तक सो लेना भी रात की नींद में गड़बड़ी करता हैं इस लिए दिन में लम्बी नींद से बचना चाहिए। शाम के समय हल्का-फुल्का शारीरिक श्रम जिसमें टहलना घूमना या घर के भीतर ही हल्का व्याया म करना रात में अच्छी नींद लाने में मददगार रहता है।
सोने के पहले हाथ-पैर और चेहरा साफ पानी से अ च्छी तरह द्दुले। जिस बिस्तर पर आप नींद लेती हैं। वह बिस्तर साफ सुथरा होना चा हिए। सायंकाल सात आठ के बाद अत्याद्दिक चाय, का फी और पान मसाला आदि के सेवन से बचें।
बेडरूम हवादार होना चा हिए और इसमें प्राकृतिक रो शनी आने की व्यवस्था होनी चाहिए।
तेज रोशनी और अत्या धिक शोर भी नींद में व्यवधा न डालते हैं। अतः बेडरूम में बहुत ज्यादा कृत्रिम रोशनी नहीं होनी चाहिए। साथ ही कमरे में म्यूजिक सिस्टम, टी0 वी0 आदि न रखें। अगर कोई उलझन है तो इस मसले को बिस्तर तक न ले जायें।
अगर कोई उलझाव वाली बात हो भी जाए तो जहाँ तक सम्भव हो सोने से पह ले ही निपटा लें। नींद की दवा अपनी मर्जी से खाने ल गना और उसके साथ एक्स पेरिमेंट करने लगना ठीक नहीं। जरूरत पड़ने पर किसी डाक्टर की सलाह से ही लें।
एक वयस्क को छह से आठ घंटे की नींद जरूरी
