एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी – गोंदिया (महाराष्ट्र)। वैश्विक स्तरपर भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसकी सबसे बड़ी पूंजी-युवाशक्ति- के पास न केवल संख्या का बल है, बल्कि बौद्धिक क्षमता, नवाचार की ऊर्जा और वैश्विक नेतृत्व का आत्मविश्वास भी है।इक्कीसवीं सदी का भारत अब केवल संभावनाओं का देश नहीं,बल्कि परिणाम देने वाला राष्ट्र बन चुका है। ऐसे समय में जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट केवल एकनारा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य का रणनीतिक मंत्र बनकर उभरा है। यह मंत्र भारतीय युवाओं के चरित्र, कार्यशैली और वैश् िवक छवि को परिभाषित करने की क्षमता रखता है। मैं एडवो केट किशन सनमुखदास भाव नानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि आज पूरी दुनियाँ भारत के युवाओं की बौद्धिक क्षमता का लोहा मान रही है अमेरिका यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों की बड़ी राजनी तिक संस्थाओं, शासन प्रणा लियों, वैश्विक कंपनियों और तकनीकी दिग्गजों में भारतीय मूल के युवा नेतृत्वकारी भूमि काओं में हैं। सीईओ से लेकर नीति-निर्माता तक, स्टार्ट- अप संस्थापकों से लेकर शोद्द वैज्ञानिकों तक, भारतीय युवा वैश्विक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं।
यह स्थिति स्वतःनहीं आई, बल्कि कठोर परिश्रम ज्ञान- संस्कृति और नैतिक मूल्यबोद्द का परिणाम है। अब आवश्य कता है कि इस बौद्धिक शक्ति को जीरो डिफेक्ट – जीरो इफेक्ट के सिद्धांत से जोड़ा जाए, ताकि भारत की कार्य संस्कृति विश्व के लिए एक मानक बने। यही वह मार्ग है जो भारत पर लगाए जा रहे टैरिफ जैसे आर्थिक स्पीड ब्रेकर अस्त्रों को निष्प्रभावी कर सकता है। यदि भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी है, तो शासकीय और निजी दोनों क्षेत्रों में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी को यह समझना होगा कि भ्रष्टाचार राष्ट्र की सबसे बड़ी कमजोरी है। अल्पकालिक व्यक्तिगत सुख सुविधा या स्वार्थ के लिए लिया गया एक भी गलत निर्णय देश की दीर्घकालिक साख को चोट पहुँचाता है। जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट का वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा जब कार्य प्रणाली में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही होगी। निजी हित को परे रखकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना आज कोई आदर्शवादी कल्पना नहीं, बल्कि आर्थिक और नैतिक अनिवा र्यता बन चुकी है।
जब कर्मचारी, उद्यमी और अधिकारी अपने दायित्व को राष्ट्र- निर्माण से जोड़ेंगे, तभी भारत पुनः सोने की चिड़िया की संज्ञा को आधुनिक संदर्भ में सार्थक कर पाएगा न केवल त्रेता युग या सतयुग की कल्प ना के रूप में, बल्कि इक्कीसवीं सदी की आर्थिक और तकनी की वास्तविकता के रूप में भी भारत का हर नागरिक अपने जीवन को स्वर्ग से सुंदर बना सकते हैं।
साथियों बात अगर हम मेक इन इंडिया और जीरो डिफेक्ट -जीरो इफेक्ट का अभिन्न संबंध इसको समझने की करें तो मेक इन इंडिया तब तक पूर्ण नहीं हो सकता, जब तक उसके केंद्र में जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट का दर्श न न हो। विनिर्माण, उत्पादन आपूर्ति श्रृंखला, सेवा क्षेत्र और पर्यावरण हर गतिविधि में युवाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। गुणवत्ता में कोई दोष न हो और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े यही आधुनिक विकास का वैश्विक मानदंड है। जब भारत में निर्मित वस्तुएँ और सेवाएँ गुणवत्ता, विश्वसनीयता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतीक बनेंगी, तब मेड इन इंडिया केवल एक टैग नहीं, बल्कि भरोसे की मुहर बन जाएगा। दुनियाँ यह कहने लगे कि यदि कोई उत्पाद लेना है, तो भारत में निर्मित उत्पाद ही लेना चाहिए, क्यों कि वह सर्वोत्तम है, टिकाऊ है और नैतिक उत्पादन का सटीक उदाहरण है।
साथियों बात अगर हम विश्व गुरु की अवधारणा और विजन 2047 इसको समझने की करें तो,यदि विश्व में यह धारणा स्थापित हो जाती है कि भारत की वस्तुएँ और सेवाएँ गुणवत्ता में बेजोड़ हैं,तो भारत का विश्व गुरु बनना कोई दूर का सपना नहीं रहेगा। विजन 2047 जब भारत अप नी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा तब तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि मानसिकता और मूल्यों में भी दिखाई दे।भारत की अर्थव्यवस्था का दसवें स्थान से चैथे स्थान तक पहुँचना यह संकेत देता है कि दिशा सही है। अब समय है कि युवा मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की कमान स्वयं संभालें। नेतृत्व केवल पद से नहीं, बल्कि दृष्टि, कौशल और चरित्र से आता है। साथियों बात अगर हम टेक- आत्मनिर्भर भारत रूअगली बड़ी छलांग इसको समझने की करें तो, आने वाले दशक का सबसे बड़ा फोकस टेक-आत्मनिर्भर भारत होना चाहिए।नवाचार अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रक्षा तकनीक, हरित ऊर्जा, बायोटेक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इन सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता भारत की रणनीतिक सुरक्षा और आर्थिक मजबूती दोनों के लिए आवश्यक है। अब समय आ गया है कि भारत की आवश्यकताओं को प्राथमि कता दी जाए और नए उत्पादों का विकास तेजी से किया जाए। ये उत्पाद केवल सस्ते नहीं, बल्कि श्रेष्ठ होने चाहिए, जीरो डिफेक्ट- जीरो इफेक्ट के सिद्धांत पर आधारित। भारत के युवाओं की प्रतिभा ही आत्मनिर्भर भारत के इस विजन का नेतृत्व करेगी और विश्व को बताएगी कि नवाचार का नया केंद्र अब भारत है।
साथियों बात अगर हम राष्ट्रीय हित, स्पष्ट इरादे और ईमानदार प्रयास इसको सम झने की करें तो, भारत तेजी से दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।लेकिन आर्थिक आकार तभी सार्थक होगा जब उसके पीछे राष्ट्रीय हित को समर्पित दृष्टिकोण होगा। चाहे हम राष्ट्र-राज्य की सेवा में हों या निजी क्षेत्र में हम सब को भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस अपनानी होगी। यदि हर नागरिक यह संकल्प ले कि वह एक रुपये का भी भ्रष्टा चार नहीं करेगा, तो विजन 2047 की मंजिल तक पहुँचने से भारत को कोई शक्ति नहीं रोक सकती।
यह गति सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की भाव ना से आएगी। यह गति स्पष्ट इरादों और ईमानदार प्रयासों से जन्म लेगी।
साथियों बात अगर हम भारतीय प्रधानमंत्री का संदेश और युवाओं की भूमिका को समझने की करें तो पीएम द्वारा लाल किले से लेकर विभिन्न मंचों तक और 25 जनवरी 2026 के मन की बात कार्यक्रम में जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट पर दिया गया जोर यह स्पष्ट करता है कि यह केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्माण का आह्वान है। युवा ओं के लिए यह संदेश विशेष रूप से रेखांकित करने योग्य है, क्योंकि भविष्य का भारत उन्हीं के हाथों में है।
आज जो अवसर, संसा धन और सुविधाएँ उपलब्ध हैं, संभव है भविष्य में वैसी परिस्थितियाँ न रहें। इसलिए समय की मांग है कि निजी स्वार्थ छोड़कर राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाया जाए और मेक इन इंडिया को अभूतपूर्व प्रतिसाद दिया जाए।
साथियों बात अगर हम टैरिफ की दीवारें और भारतीय गुणवत्ता की ताकत इसको समझने की करें तो यदि भारत जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट के मंत्र पर ईमानदारी से चलता है तो कोई भी देश, चाहे वह अमेरिका ही क्यों न हो 100, 500 या 1000 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए, भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग को रोक नहीं सकता। जब गुणवत्ता निर्विवाद होगी, तो टैरिफ की दीवारें स्वयं कमजोर पड़ जाएँगी दुनियाँ तब भारतीय उत्पादों को इसलिए खरीदेगी क्योंकि वे श्रेष्ठ हैं, टिकाऊ हैं और भरोसेमंद हैं। भारत में निर्मित वस्तुओं का ऐसा सिक्का जमेगा कि टैरिफ का बंधन भी उसे रोक नहीं पाएगा। यही स्थिति भारत के विकास और विजन 2047 की यात्रा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मंत्र के सहयोगसे मिशन तक पहुंचने की यात्रा हम आसानी से पूरी कर सकते हैं जीरो डिफेक्ट- जीरो इफेक्ट आज एक मंत्र नहीं, बल्कि मिशन बन चुका है।यह मिशन भारतीय युवाओं की सोच, कार्य और नेतृत्व को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने का आह्वान करता है। यदि भारत का हर युवा इसे अपने जीवन और कार्यशैली का हिस्सा बना ले, तो न केवल भारत आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दुनियाँ के लिए एक नैतिक, टिकाऊ और विश्वसनीय विकास माॅडल भी प्रस्तुत करेगा।
विजन 2047 कोई सपना नहीं, बल्कि एक साकार होने योग्य लक्ष्य है, बशर्ते हम आज सही संकल्प लें, सही दिशा चुनें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। यही भारत की शक्ति है, यही भारत का भविष्य हैं।
भारतीय मिशन जीरो डिफेक्ट- जीरो इफेक्ट से अमेरिका सहित किसी भी देश द्वारा लगाया 100, 500 या 1000 प्रतिशत तक, टैरिफ की दीवारें भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग को रोक नहीं सकती
