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यह संघर्ष सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व घटनाओं में से एक है, जिसके परिणाम दशकों तक वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर प्रभाव डाल सकते हैं

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तरपर सारी दुनियाँ हैरान रह गई जब 3 जनवरी 2026 की रात अमे रिका ने आपरेशन एबस्युलेट रेसोल्व के नाम से एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला या। इसके तहत अमेरिकी वायुसेना और विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी कारा कस समेत कई इलाकों में हवाई हमले किए और राष्ट्र पति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलीया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया गया। जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में अमेरिका द्वारा एक तेजी से आगे बढ़ी सैन्य कार्र वाई की गई, अमेरिकी राष्ट्र पति ने पुष्टि की कि अमेरिका ने वेनेजुएला में हवाई हमलों और विशेष ऑपरेशन के जरिए मादुरो को हिरासत में लिया और उन्हें विदेश ले लाया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि मादुरो पर नार्को- आतंकवाद, कोकीन तस्करी, साजिश और अमेरि का के खिलाफ हथियार रखने जैसे गंभीर आरोप हैं,जिनके कारण वह अमेरिकी न्याय के सामने खड़ा होगा। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि इन्हीं अभियोगों के आधार पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होगी। यह आरोप अमेरिका के अंतर्गत जारी अभियोगों पर आधारित हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि मादुरो की सरकार और सहयोगी अमेरि की हितों और कानूनों के खिलाफ भारी मात्रा में अवैद्द गतिविधियों में संलग्न थे।
हालांकि मादुरो और उन के समर्थक इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुख दास भावनानी गोंदिया महा राष्ट्र यह मानता हूं कि वैश्वि क स्तर पर वेनजुएला और अमेरिका के बीच तनाव कोई नया विषय नहीं है। दशकों से दोनों देशों के बीच राज नीतिक, आर्थिक और सामरिक तनाव रहा है जिसमें मुख्य रूप से तेल संसाधनों, असं तुलित द्विपक्षीय संबंधों और मतभेद शामिल हैं।1976 में वेनेजुएला ने अपने तेल उद्योग को राष्ट्रीयकृत किया था, जिस से अमेरिकी कंपनियों का नियं त्रण खत्म हो गया था जिस पर अमेरिका ने लंबे समय तक आपत्ति जताई। इसके बाद से दोनों देशों के बीच कड़वी टक्कर और भी तीव्र होती गई।
साथियों बात अगर हम इस कार्रवाई को अमेरिकी राष्ट्र पति ने एक सफल सैन्य आप रेशन बताया है इसको सम झने की करें तो, उन्होंने वेने जुएला में ड्रग तस्करी और नार्को-आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया गया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब अस्थायी रूप से वेनेजुएला के सरकारी कार्यों को संभा लेगा और देश को सुरक्षित, व्यवस्थित और न्यायपूर्ण संक्र मण की ओर ले जाएगा।
उनके खिलाफ नार्को- टेररिज्म, कोकीन की तस्करी और साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं और उन्हें न्घ्यूयॉर्क के संघीय न्यायालय में ट्रायल का सामना करने का इरादा बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उन अभियोगों के आधार पर है जो मादुरो पर भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद समर्थित गतिविधियों के लिए लगाए गए हैं। वहीं मानवाधिकार संग ठनों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों ने इस आपरेशन को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया है क्योंकि यह बिना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के एक संप्रभुत राष्ट्र के खिलाफ सश स्त्र हमला है।
साथियों बात अगर हम हमले के बाद विश्व के प्रमुख देशों की प्रतिक्रियाओं को सम झने की करें तो, क्या तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने वाला है? इस वैश्विक घटना पर रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों ने तेज प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ये देश अमेरिकी कार्र वाई को वेनेजुएला की संप्र भुता का उल्लंघन, क्षेत्रीय अखं डता का भंग और एक शक्तिवा दी आक्रमण बताते हुए निंदा कर रहे हैं।
रूस ने अमेरिका की इस हरकत को अंतरराष्ट्रीय निय मों के खिलाफ बताया है। ईरान और क्यूबा ने भी संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका की इस कार्रवाई की निंदा करने और शांति स्थापित करने की अपील की है। वहीं यूरोपीय संघ ने स्थि ति से कुछ अलग रुख अप नाया उन्होंने सीधे निंदा नहीं की, बल्कि तथ्यों की पुष्टि और तथ्यों के प्रकाश में निर्णय लेने की बात कही,यह कहते हुए कि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करते हैं। जिसका व्यापक अर्थ यह है कि ईयू ने खुलकर अमेरिका का समर्थन नहीं किया, लेकिन स्पष्ट निंदा भी नहीं की। कुछ देशों ने इस संकट को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक का विषय बनाया है, तकघ्रीबन सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियाँ इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून की बड़ी परीक्षा के रूप में देख रही हैं।साथियों बात अगर हम तेल और ड्रग्स विवाद की पृष्ठभूमि को समझ ने की करें तो अमेरिका का कहना यह है कि वेनेजुएला दुनियाँ के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक का घर है और यह देश नशीले पदार्थों और अपराध नेटवर्क के लिए एक मुख्य केंद्र बन गया है, इसलिए इस कार्रवाई को उस ने नशीले पदार्थों का मुकाबला करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुरक्षित रखने की आवश्यक कार्रवाई बताया है। परन्तु आलोचक इसे तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाने की एक अर्थव्यवसायिक रणनीति के रूप में भी देखते हैं। वे तर्क देते हैं कि इस हमले के पीछे आर्थिक हितों की बड़ी भूमिका हो सकती है, क्योंकि वेनेजुए ला के तेल भंडारों के कारण यह क्षेत्र आर्थिक और सामरिक रणनीति के केंद्र में पहुंच गया है। साथियों बात अगर हम मानवाधिकार और वैधता के सवाल के दृष्टिकोण से सम झने की करें तो, कई मानवा धिकार समूहों ने कहा है कि अमेरिका बिना सबूत और पार दर्शिता के निर्दोष नागरिकों और नेताओं को निशाना बना रहा है, और यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ हो सकती है, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि एक देश दूसरे देश पर बिना सुरक्षा परिषद की अनुमति या प्रस्तुत खतरे के जवाब में बल का प्रयोग नहीं कर सकता है। यह विवाद अब अंतरराष्ट्रीय अदालतों, संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शांति संरचनाओं के लिए एक बड़ा परीक्षण बन गया है। साथियों बात अगर हम अंतर राष्ट्रीय कानून और सार्वभौमिक संप्रभुता के दृष्टि कोण से इस मुद्दे को समझने की करें तो, किसी देश के सिटिंग राष्ट्रपति-समेत किसी राष्ट्राध्यक्ष को एक अन्य देश के सशस्त्र बलों द्वारा पकड ़कर विदेश लाना, अंतरराष्ट्रीय कघनून सहित संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों का जटिल उल्लंघन हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर की धारा 2(4) के अनुसार, किसी अन्य राज्य के खिलाफ बल प्रयोग केवल स्वयं रक्षा या यूएन सुरक्षा परिषद की अनु मति के तहत ही किया जा सकता है। अमेरिका ने अपने आपरेशन को न्यायिक कारणों, मादुरो पर अभियोग और सुर क्षा हितों के आधार पर समझा या है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्याय विशेषज्ञ यह कहते हैं कि किसी अन्य देश के उच्च तम नागरिक नेता के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और हिरासत लेना सीधे तौर पर संप्रभुता का उल्लंघन और बल प्रयोग का उदाहरण है, जब तक कि यह सीधे तौर पर खुद अमेरि का के विरुद्ध सीधा हथियार बंद हमला न रहा हो।
कई विशेषज्ञों ने इसे अप राधी आक्रमण तक कहा है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। संप्रभुता का उल्लंघन तब अधिक गहरा हो जाता है जब उस देश की संसद या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी नहीं ली जाती, जैसा इस मामले में स्पष्ट नहीं दिख रहा है। अंतर राष्ट्रीय कानून के मानदंडों के अनुसार, वर्चस्ववादी शक्ति यों के इस तरह के हस्तक्षेप से वैश्विक आदेश और मानक प्रभावित होते हैं, जिससे भवि ष्य में अन्य नियमित रूप से चुने गए नेताओं पर भी इसी तरह के दावों के आधार पर कार्रवाई का परिसेडेंट बन सकता है।
साथियों बात अगर हम, यह वैश्विक लोक लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लंघन है या नहीं? इसको समझने की करें तो, यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या अमेरिका के इस कदम से वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लंघन होता है? इस विवाद का उत्तर सरल नहीं है, क्योंकि इसमें राजनी तिक वैचारिकता, शक्ति- राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्य वस्था के सिद्धांतों का मिश्रण है। एक तरफ अमेरिका और उसके समर्थक देश यह तर्क देते हैं कि मादुरो जैसे नेता ने अपनी सरकार के भीतर तख्तापलट, भ्रष्टाचार और मान वाधिकार उल्लंघन की नीति यों को लागू किया है।
अमेरिकी प्रशासन इसे अपराध नियंत्रण और लोकतंत्र स्थापना के रूप में पेश कर रहा है। दूसरी ओर, ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक और कई देशों के सरकारी बयान बताते हैं कि ऐसा सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है, क्योंकि इसने किसी देश की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, चुना वों और निरंकुश संप्रभुता को दरकिनार किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि अंत रराष्ट्रीय कानून का सम्मान और संप्रभुता का आदर करना ही वैश्विक व्यवस्था का आ धार है, इसलिए, यह कहना अधिक सटीक होगा कि अमे रिका का यह कदम वैश्विक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौतीपूर्ण परिदृश्य बन गया है, भले ही इसे कुछ राजनी तिक तर्क दिए जाएं।
साथियों बात अगर हम क्या ‘तीसरा विश्व युद्ध’ शुरू होने वाला है? इस प्रश्न को समझने की करें तो, जहाँ एक ओर यह घटनाक्रम वैश्विक सत्ता संतुलन में एक बड़ा बद लाव दिखाता है, वहीं विश्ले षकों की राय में अभी तक तीसरे विश्व युद्ध जैसी कोई निश्चित शुरुआत नहीं हुई है।
एक तीसरा विश्व युद्ध की शुरुआत तभी मान्य होगी जब दो या दो से अधिक परमाणु- सक्षम रणनीतिक धड़े एक दूसरे के विरुद्ध व्यापक सैन्य गठबंधन, आर्थिक ब्लॉकों और वैश्विक स्तर पर जारी संघर्ष में डूबें, जो इस समय का वास्तविक परिदृश्य नहीं है। हालांकि रूस, ईरान, क्यूबा और चीन जैसे देशों ने अमे रिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और यह कहा है कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता को खतरे में डाल सकता है, वैश्विक युद्ध के जोखिमों पर बहस तेज हुई है। जिन देशों ने आलोच ना की है, वे यह मानते हैं कि अगर दुनियाँ की प्रमुख शक्तियाँ एक दूसरे के खिलाफ सैन्य गठबन्धनों और प्रकार्या त्मक हिंसा की ओर बढ़ीं, तो एक बड़े पैमाने पर संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है।फिर भी, वैश्विक नेताओं के लिए तीसरा विश्व युद्ध की घोषणा किसी भी तरह से आधिका रिक तौर पर नहीं हुई है। इस विषय पर विशेषज्ञ अभी आगे की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रि याओं और संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाइयों का इंतजार कर रहे हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यह घटना न सिर्फ दक्षिण अमेरिका या अमेरिका का विषय है, बल्कि यह वैश् िवक शक्ति समीकरण, अंतर राष्ट्रीय कानून, संप्रभुता तथा वैश्विक सुरक्षा संरचनाओं की परीक्षा भी है। अमेरिका का तर्क है कि यह कार्रवाई नार्को -टेररिज्म और सुरक्षा कारणों से आवश्यक थी।कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन घोषित किया है।
संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक शक्ति याँ, क्षेत्रीय समूह और न्याय विद इस पर गहरा विश्लेषण कर रहे हैं। यह संघर्ष समय की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं में से एक है और इसके परिणाम दशकों तक वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर प्रभाव डाल सकते हैं।

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