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चलती ट्रेन से स्टंट हो या मोबाइल पर तेज आवाज में हुड़दंगए रेलवे की सख्ती बढ़ीए जानिए रेलवे अधिनियमए 1989 की संशोधित धारा 145 व 147 क्या है कानून!

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया ;महाराष्ट्रद्ध।
वैश्विक स्तरपर डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की होड़ ने मनोरंजन की दुनियाँ को जितना व्यापक बनाया हैए उतना ही गंभीर सवाल सार्व जनिक सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर भी खड़ा किया है। कुछ सेकंड की रीलए हजारों व्यूज और सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में अनेक युवा ऐसे वीडियो बनाने की कोशिश करते हैंए जिनमें चलती ट्रेन के दरवाजे पर खड़े होनाए रेलगाड़ी से बाहर झूलनाए रेलवे ट्रैक के आसपास खतरनाक गतिवि धियां करना अथवा स्टेशन परिसर में जोखिम भरे दृश्य फिल्माना शामिल होता है।
दूसरी ओरए रेलगाड़ियों के भीतर मोबाइल फोन के स्पीकर पर तेज आवाज में रीलए गाने और वीडियो चलाना भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता है। इन दोनों समस्याओं की प्रकृति अलग हैए लेकिन इनके केंद्र में सार्व जनिक सुरक्षाए अनुशासन और दूसरे यात्रियों के अधिकारों का सम्मान करने का सवाल है। भारतीय रेलवे ने अब मो बाइल पर तेज आवाज से होने वाले उपद्रव के विरुद्ध भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदि या महाराष्ट्र बताना चाहूंगा कि 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार 19 अक्टूबर 2026रू रेलवे का नया अलर्ट क्यों है महत्वपूर्णए रेलवे के विभिन्न जोनों ने यात्रियों को मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत और वीडियो चलाने से रोकने के लिए जागरूकता तथा प्रवर्तन संबंधी कदम उठाने की तैयारी की है। दक्षिण रेलवे ने 6 अक्टूबर 2026 के एक सर्कुलर के माध्यम से अपने मंडलों को निर्देश दिया कि ट्रेनों और रेलवे परिसर में स्पी कर मोड पर संगीत अथवा वीडियो चलाने तथा जोर. जोर से बातचीत करने से होने वाली परेशानी के प्रति यात्रियों को जागरूक किया जाए। रिपोर्ट में उत्तर रेलवे और पश्चिम रेलवे की ओर से भी ऐसी गतिविधियों पर कार्रवाई करने के प्रयासों का उल्लेख है। स्टेशनों पर सार्व जनिक उद्घोषणा प्रणालीए सूचना संदेश और संबंधित रेल कर्मचारियों के माध्यम से यात्रियों को नियमों का पालन करने के लिए सचेत करना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकिए उपलब्ध रिपोर्ट को पूरे देश में एक ही दिन जारी हुए किसी एक नए रेलवे बोर्ड आदेश का प्रमाण मानने के बजाय संबंधित जोनों की कार्रवाई के संदर्भ में पढ़ना स टीकता से अधिक उचित होगा।
साथियों बात अगर हम आधिकारिक गैजेट और सर्कु लर जारी होने की तारीखों को समझने की करें तो इस नई नियमावली का मुख्य आ धार जन विश्वास ;प्रावधानों का संशोधनद्ध अधिनियमए 2026 है। इस अधिनियम को महाम हिम राष्ट्रपति द्वारा 7 अप्रैलए 2026 को मंजूरी दी गई थी और 8 अप्रैलए 2026 को इसे भारत के आधिकारिक राज पत्र में प्रकाशित किया गया था। इसके बादए रेलवे बोर्ड ने 23 जूनए2026 को आधि कारिक सर्कुलर ;सर्कुलर संख्या ध्अधिसूचना सं0 एसओण्3255 ;ईद्ध दिनांक 19ण्06ण्2026द्ध जारी किया। इस सर्कुलर के माध्य म से सभी क्षेत्रीय रेलवे कार्या लयों ;जैसे उत्तर रेलवेए दक्षिण रेलवे आदिद्ध को नियमों में किए गए संशोधनों को लागू करने के कड़े निर्देश भेजे गए थे। जोनल रेलवे के ताजा सख्त निर्देशः इस मुख्य आदेश के अनुपालन मेंए विभिन्न रेलवे जोनों ;जैसे चेन्नई और दक्षिण रेलवे प्रभागोंद्ध ने अक्टूबर 2026 में फिर से विशेष जन. जाग रूकता और कड़े दिशा. निर्देश जारी किए हैं ताकि ट्रेन के भीतर मोबाइल स्पीकर पर रील्स चलाकर उपद्रव करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। यह संशोधित नियम पूरे देश में तत्काल प्रभाव से पूरी तरह लागू हैं। रेलवे बोर्ड के जून 2026 के सर्कुलर के बाद से ही चेकिंग स्टाफ ;टीटी ईद्धए रेलवे सुरक्षा बल ;आरपीएफद्ध और राजकीय रेलवे पुलिस ;जीआरपीद्ध को रेलवे अधिनि यम की संशोधित धारा 145 ;उपद्रव मचानाद्ध और धारा 147 ;अतिक्रमणध्स्टंट रील बनानाद्ध के तहत मौके पर ही जुर्माना वसूलने और कानूनी कार्रवाई करने का पूर्ण अधि कार मिल चुका। यह जानका री मीडिया से उठाई गई है।
साथियों बात अगर हम मोबाइल पर तेज आवाज में रील चलाना भी बन सकता है कानूनी परेशानी के कारण को समझने की करें तोए रेल यात्रा के दौरान प्रत्येक यात्री को आराम से सफर करनेए पढ़नेए सोने और शांत वाताव रण में समय बिताने का अद्दि कार है। यदि कोई व्यक्ति मोबा इल फोन के स्पीकर पर लगा तार तेज आवाज में रीलए गाने या वीडियो चलाता है अथवा जोर.जोर से बातचीत करके सहयात्रियों को परेशान करता हैए तो परिस्थितियों के अनु सार यह रेलवे अधिनियम के तहत उपद्रव की श्रेणी में आ सकता है। रेलवे अधिनियमए 1989 की धारा 145 उपद्रवए अभद्र व्यवहार तथा यात्रियों की सुविधाजनक यात्रा को प्रभावित करने वाले कुछ कृत्यों से संबंधित है। इसके अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है और संबंधित व्यक्ति को रेलवे परिसर से हटाने की भी व्यव स्था है। भारतीय रेलवे से संबं धित 19 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों में पहली कार्रवाई के लिए 1ए000 रूपए तक के जुर्माने और गंभीर या बार.बार उल्लंघन की स्थिति में अद्दि क कठोर दंड का सटीकता से उल्लेख किया गया है।
साथियों बात अगर हम 1ए000 से 5ए000 रूपए तक जुर्माना और जेल. किन बातों को समझना जरूरी हैघ् इस को समझने की करें तोए इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दंड के बारे में सही जानकारी है। मीडिया रिपोर्टों के मुता बिकए रेलवे के हालिया निर्देशों में उपद्रव करने वाले यात्रियों के लिए 1ए000 रूपए तक का जुर्माना और कुछ परिस्थितियों में छह महीने तक की कैद का उल्लेख किया गया है।
चेतावनी के बाद भी उप द्रव जारी रखने पर 5ए000 रूपए तक के जुर्माने की संभा वना भी रिपोर्ट की गई है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मोबाइल पर हर वीडियो देखने वाले यात्री पर स्वतः 5ए000 रूपए का जुर्माना लगेगा या उसे निश्चित रूप से जेल भेज दिया जाएगा। कार्रवाई संबंधित कानूनए अपराध के तथ्योंए लागू दंड प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के अनुसार होगी। सामान्य रूप से ईयरफोन लगाकर वीडियो देखना या संगीत सुनना प्रतिबं धित नहीं हैए बशर्ते इससे दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो और रेलवे के अन्य नियमों का उल्लंघन न किया जाए। इस लिए यात्रियों को भय के बजाय नियमों की सही समझ के साथ जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। साथियों बात अगर हम जन विश्वास अधिनियमए 2026 और रेलवे अधिनियम की कानूनी पृष्ठभूमि को सम झने की करें तोए जन विश्वास ;प्रावधानों का संशोधनद्ध अद्दि नियम 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी 7 अप्रैल 2026 को मिली और इसे 8 अप्रैल 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। केंद्र सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसारए इस कानून के माध्यम से 79 केंद्रीय अद्दि नियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन किए गए और 717 प्रावधानों को अपराध मुक्त कर ने की दिशा में कदम उठाया गया। इसका व्यापक उद्देश्य छोटे उल्लंघनों के लिए दंड व्यवस्था को तर्कसंगत बनाना और नियामकीय प्रक्रियाओं को सटिका से अधिक व्यावहारि क बनाना है।
साथियों मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो चलाने की समस्या से अलगए चलती ट्रेन से झूलनाए दरवाजे पर असुर क्षित ढंग से खड़े होकर वीडि यो बनाना या रेलवे ट्रैक पर जोखिम भरी गतिविधियां कर ना कहीं अधिक गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। ऐसी हरकत से संबंधित व्यक्ति के साथ.साथ रेल परिचालन और दूसरे लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। रेलवे अधिनियम की धारा 147 बिना वैध अधिकार रेलवे परि सर में प्रवेश करनेए रेलवे संप त्ति का दुरुपयोग करने अथवा वैध निर्देश के बावजूद वहां से हटने से संबंधित है। इस धारा का उपयोग तथ्यों के आधार पर हो सकता हैए लेकि न हर प्रकार की रील बनाने को अपने आप धारा 147 के तहत अपराध घोषित करना सही नहीं होगा।
इसी तरहए प्रत्येक वीडियो के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य होने का व्यापक दावा भी संबंधित स्था नए गतिविधि और लागू रेलवे निर्देशों की पुष्टि के बिना नहीं किया जाना चाहिए। युवाओं को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर कुछ क्षणों की लोकप्रियता जीवनभर की सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। किसी भी वायरल वीडियो की नकल करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि उसमें दिखाई गई गतिविधि सुरक्षित और वैध है या नहीं।
रेलवे ट्रैकए चलती ट्रेन के दरवाजे और रेलगाड़ी की छत मनोरंजन या स्टंट के स्थान नहीं हैं। ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के बजाय सुरक्षित और रचनात्मक सामग्री बनाने की संस्कृति को प्रोत्साहित कर ना समय की मांग है।
साथियों बात अगर हम रेलवे कर्मचारी क्या कर सकते हैं और यात्री शिकायत कैसे करेंघ् इसको समझने की करें तोए रेलवे कर्मचारियों तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे लागू निय मों के अनुसार यात्रियों को सचेत करें और उल्लंघन होने पर उचित कार्रवाई करें। टि कट जांच कर्मचारीए रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलि स अपनी.अपनी वैधानिक शक्तियों तथा अधिकार .क्षेत्र के भीतर काम करते हैं। कि सी कर्मचारी को निर्देश देने या कार्रवाई करने का अधि कार होना और प्रत्येक मामले में मौके पर ही मनमाना जुर्माना लगाने का अधिकार होना दो अलग बातें हैं।
इसलिए यात्रियों को कार्र वाई की स्थिति में संबंधित नियम और आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी मांगनी चाहिए।
साथियोंए यदि यात्रा के दौ रान कोई व्यक्ति तेज आवाज में मोबाइल चलाकर परेशानी पैदा करता हैए अभद्र व्यवहार करता है या रेलवे सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करता हैए तो यात्री रेलवेके आधिका रिक शिकायत माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। रेल मदद पोर्टल या ऐप तथा रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से शिकायत की जा सकती है। शिकायत में ट्रेन संख्याए कोचए यात्रा का समय और समस्या का संक्षिप्त विवरण देना उप योगी रहता है। यदि तत्काल सुरक्षा का खतरा होए तो रेलवे कर्मचारियों या सुरक्षा कर्मियों को तुरंत सूचित करना चाहिए। यात्रियों को स्वयं किसी उप द्रवी व्यक्ति से भिड़ने अथवा जोखिम उठाकर वीडियो बना ने की आवश्यकता नहीं है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि रेलवे केवल परिव हन का साधन नहींए साझा सार्वजनिक जिम्मेदारी भी है भारतीय रेलवे में अनुशासन कायम करना केवल सरकारए रेलवे बोर्ड या सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है। हर यात्री का व्यवहार दूसरे यात्रि यों के अनुभव और सुरक्षा को प्रभावित करता है। मोबाइल पर तेज आवाज में रील चलाने से बचना ईयरफोन का इस्ते माल करनाए सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित आवाज में बात चीत करना और खतरनाक स्टंट से पूरी तरह दूर रहना सामान्य नागरिक शिष्टाचार के साथ. साथ सुरक्षित रेल यात्रा की बुनियादी शर्तें हैं। 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों से स्पष्ट संदेश मिलता है कि रेलवे सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल से होने वाले उप द्रव को गंभीरता से ले रहा है। साथ हीए खतरनाक रील बाजी रोकने के लिए जागरू कताए निगरानी और लागू का नूनों के अनुसार कार्रवाई आव श्यक है। सोशल मीडिया पर लोक प्रियता क्षणिक हो सक ती हैए लेकिन सुरक्षा और जिम् मेदारी का महत्व स्थायी है।
रेल यात्रा को सुरक्षितए शांतिपूर्ण और सुविधाजनक बनाना तभी संभव हैए जब हर यात्री यह समझे कि सार्व जनिक स्थान पर उसकी स्व तंत्रता वहीं तक हैए जहां तक वह दूसरों के अधिकारों और सुरक्षा का सम्मान करती है।

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