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नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डाक्यूमेंट 2026- 2029 -क्या भारत की जीरो टालरेंस नशा नीति को ऐतिहासिक सफलता दिलाएगी

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तर पर जिस प्रकार भारत ने वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध समयबद्ध रणनीति अप नाकर विजन 2026 के माध्य म से नक्सलवाद को निर्णायक रूप से समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया, उसी प्रकार अब केंद्र सरकार ने मादक पदा र्थों की तस्करी और नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध भी एक स्पष्ट, बहुस्तरीय और सम यबद्ध अभियान प्रारंभ किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 26 जून 2026 को नार्को- कोआर्डिनेशन सेंटर (नाकार्ड) की 10वीं शीर्ष स्त रीय बैठक में जारी नारकोटि क्स कंट्रोल विजन डाक्यूमेंट 2026- 2029 केवल एक प्रशा सनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, युवा ओं के भविष्य और संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध के विरुद्ध घोषित रणनीतिक युद्ध का रोड मैप है। गृह मंत्री द्वारा प्रस्तुत 3डी रणनीति-डिटेक्ट, डिसट्रपट और डिस्ट्राय, इस नई नीति का संचालन सिद्धांत है। डिटेक्ट का अर्थ है अत्या धुनिक तकनीक, खुफिया सूच नाओं और डेटा विश्लेषण के माध्यम से नेटवर्क की प्रारंभिक पहचान करना। डिसट्रप्ट का उद्देश्य अपराधी नेटवर्क की गति विधियों को बीच में ही रोक देना है ताकि वे अपनी आपूर्ति श्रृंखला संचालित न कर सकें। डिस्ट्राॅय का आशय है अपरा धियों के आर्थिक स्रोत, अवैद्द संपत्तियों, उत्पादन केंद्रों और पूरे नेटवर्क को स्थायी रूप से समाप्त करना। यह रणनीति केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं बल्कि अपराध की संरच ना को ध्वस्त करने पर आधा रित है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले तीन वर्ष यह तय करेंगे कि भारत नशे के वैश्विक नेटवर्क के सामने झुकेगा या उसे निर्णा यक रूप से परास्त करेगा।
मैं एडवोकेट किशन सन मुखदास भावनानीं गोंदिया महा राष्ट्र यह मानता हूं कि आज मादक पदार्थों की तस्करी पारं परिक अपराध की सीमा से बहुत आगे निकल चुकी है। यह आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, हवाला, मनी लान्ड्रिंग, साइबर अपराध और अंतररा ष्ट्रीय संगठित अपराध से गहराई से जुड़ चुकी है।
दुनियाँ के अनेक सुरक्षा विशेषज्ञ यह मानते हैं कि ड्रग्स का पैसा अक्सर आतंकवादी संगठनों, उग्रवादी नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट की वित्तीय जीवनरेखा बनता है। इसी कारण भारत सरकार ने पहली बार स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि ड्रग्स केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुर क्षा का गंभीर प्रश्न है।
यह दृष्टिकोण भारत की एंटी- नारकोटिक्स नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है। साथियों नाका र्ड की 10वीं बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले तीन वर्ष यह निर्धारित करेंगे कि नशा भारत पर हावी होगा या भारत नशे पर विजय प्राप्त करेगा। यह केवल राजनीतिक वक्तव्य नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का सार्वजनिक संकल्प है। इस बैठक में केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्रीय जांच एजेंसियों, सुरक्षा बलों और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस चुनौती को पूरे शासन तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी मान रही है।
नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डाक्यूमेंट 2026- 2029 की सबसे बड़ी विशेषता इसका त्रिस्तरीय दृष्टिकोण है।पहला लक्ष्य है डिमांड रिडक्शन, अर्था त् समाज विशेषकर युवाओं में नशीले पदार्थों की मांग को कम करना। दूसरा लक्ष्य है सप् लाई रिडक्शन, अर्थात तस्करी की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करना। तीसरा लक्ष्य है हार्म रिडक्शन एवं पुनर्वास, अर्थात् नशे के शिकार व्यक्तियों को अपराधी नहीं बल्कि उप चार और पुनर्वास के पात्र नाग रिक मानते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना। यही संतुलित दृदृष्टिकोण आद्दु निक वैश्विक ड्रग नीति का भी आधार माना जाता है।
साथियों, इस विजन डाक् यूमेंट की सबसे महत्वपूर्ण विशे षता यह है कि यह केवल ड्रग्स पकड़ने की नीति नहीं है बल्कि पूरे अपराधी नेटवर्क को नष्ट करने की रणनीति प्रस्तुत करता है। पहले जहां कार्रवाई का मुख्य केंद्र ड्रग्स की बरामदगी और छोटे तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित रह ता था, वहीं अब लक्ष्य पूरे अंतर राष्ट्रीय कार्टेल, उनके वित्तीय स्रोत, हवाला नेटवर्क, मनी ला न्ड्रिंग चैनल, डार्कनेट प्लेट फार्म और विदेशी संचालकों तक पहुंचना है। यह नेटवर्क -आधारित प्रवर्तन भारत की जांच प्रणाली को अधिक प्रभा वी बना सकता है। बीते कुछ वर्षों में ड्रग्स तस्करी का स्व रूप तेजी से बदला है। अफीम, चरस और गांजा जैसे पारंप रिक मादक पदार्थों के साथ – साथ अब सिंथेटिक ड्रग्स जैसे मेथमफेटामाइन, एमडी एमए और अन्य रासायनिक नशीले पदार्थ, तेजी से फैल रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी चु नौती यह है कि इन्हें छोटे- छोटे गुप्त प्रयोगशालाओं में तैयार किया जा सकता है, इन्हें छिपाना अपेक्षाकृत आसान होता है और इनका अंतरराष् ट्रीय व्यापार डिजिटल माध्य मों से संचालित होता है। यही कारण है कि विजन डाक्यूमेंट में सिंथेटिक ड्रग्स को विशेष खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है।
साथियों, डिजिटल युग ने ड्रग तस्करी को नई दिशा दी है। डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड मैसेजिं ग प्लेटफार्म और क्रिप्टोकरेंसी ने अपराधियों को ऐसी गुम नामी प्रदान की है जिससे पारं परिक पुलिस व्यवस्था के लिए उन्हें पकड़ना कठिन हो गया है। आज कई अंतरराष्ट्रीय ड्रग सौदे बिना किसी प्रत्यक्ष संपर्क के आनलाइन तय होते हैं और भुगतान डिजिटल माध्यमों से होता है। भारत की नई नीति इसी चुनौती को ध्यान में रख ते हुए साइबर फारेंसिक, डिजि टल निगरानी, डेटा इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष बल देती है।
साथियों, भारत सरकार ने इस अभियान में वित्तीय कार्र वाई को भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया है। आधुनिक संग ठित अपराध का सबसे बड़ा आधार उसका आर्थिक संसा द्दन होता है। यदि तस्करों की संपत्ति, बैंक खाते, हवाला नेट वर्क और निवेश जब्त कर दिए जाएं तो उनका अपराध लंबे समय तक टिक नहीं सकता। इसी सोच के तहत संबंधित कानूनों के माध्यम से अवैध संपत्तियों की कुर्की, मनी लान् िड्रंग की जांच तथा आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति को मजबूत किया जा रहा है। राज्यों में गठित एंटी -नारकोटिक्स टास्क फोर्स इस अभियान की जमीनी शक्ति होगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में यह टास्क फोर्स नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगी। इसका उद्देश्य केवल पुलिस कार्रवाई करना नहीं बल्कि विभिन्न विभागों, खुफिया एजेंसियों, सीमा सुरक्षा बलों, राजस्व विभाग और अन्य संस्थाओं के बीच समन्वय स्था पित करना है। इससे सूचना साझा करने और संयुक्त कार्र वाई की क्षमता बढ़ने की संभा वना है। साथियों नाकार्ड की चार-स्तरीय संरचना,राष्ट्रीय, राज्य, जिला और उप-जिला स्तर, भारत जैसे विशाल और संघीय देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ड्रग्स नेटवर्क स्थानीय स्तर पर सक्रिय होते हैं लेकिन उनके तार अंतररा ष्ट्रीय संगठनों से जुड़े हो सक ते हैं। इसलिए स्थानीय पुलिस से लेकर केंद्रीय एजेंसियों तक एकीकृत समन्वय ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान प्रदान कर सकता है। बैठक के दौरान देशभर में लगभग 2,09,500 किलोग्राम अवैध नशीले पदार्थों का विनाश किया गया जिस की अनुमानित कीमत लगभग 6,000 करोड़ रूपए बताई गई। यह केवल प्रतीकात्मक कार्र वाई नहीं बल्कि यह संदेश है कि जब्त किए गए मादक पदार्थ पुनः अवैध बाजार में नहीं लौ टेंगे। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि विभिन्न एजें सियों के बीच समन्वित कार्र वाई के परिणाम अब अधिक व्यापक रूप में सामने आ रहे हैं। भारत सरकार ने जम्मू और गुवाहाटी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के नए क्षेत्रीय कार्यालय प्रारंभ कर सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी संस्थागत क्षम ता भी मजबूत की है। भारत की पश्चिमी और पूर्वोत्तर सी माएं लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स मार्गों से प्रभावित रही हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में संस्था गत उपस्थिति बढ़ाना रणनी तिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
साथियों, इस पूरी नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होल – आफ-गवर्नमेंट एप्रोच है। इसका अर्थ है कि ड्रग्स के विरुद्ध संघर्ष केवल गृह मंत्रालय या पुलिस की जिम्मे दारी नहीं रहेगा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, वित्त, सीमा प्रबंधन, विदेश नीति, सूचना प्रौद्योगिकी तथा अन्य मंत्रालयों सहित पूरे शासन तंत्र की साझा जिम्मेदारी होगी। जब 44 केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकारें और विभिन्न एजेंसियां एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करेंगी, तभी व्या पक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल दमनात्मक कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। यदि समाज में जागरूकता, विद्या लयों और विश्वविद्यालयों में नशा विरोधी अभियान, परि वारों की सहभागिता मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब् धता और पुनर्वास केंद्रों की प्रभावशीलता नहीं बढ़ेगी तो केवल गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। इसलिए विजन डॉक्यूमेंट में मांग कम करने और पुनर्वास को समान महत्व दिया गया है।
साथियों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ड्रग्स के विरुद्ध संघर्ष में सहयोग अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि ड्रग्स उत्पादन, तस् करी, वित्तपोषण और वितरण अक्सर कई देशों में फैला हो ता है। इसलिए प्रत्यर्पण, साझा खुफिया जानकारी, सीमा-पार जांच और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सह योग भारत की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
हालांकि किसी भी विजन डाक्यूमेंट की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि राज्यों के बीच समन्वय मजबूत नहीं होगा, जांच समयबद्ध नहीं होगी, न्या यालयों में मामलों का शीघ्र निपटारा नहीं होगा और पुनर्वास व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी, तो लक्ष्य प्राप्त करना कठिन हो सकता है। इसलिए आने वाले तीन वर्षों में वास्तविक परीक्षा केवल नीति की नहीं बल्कि उसके प्रभावी कार्यान्व यन की होगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डाक्यूमेंट 2026-2029 भारत की एंटी- ड्रग नीति में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है। यह स्पष्ट करता है कि देश अब केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमि त नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, उसके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल तंत्र और अपराधी संरचना को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें, जांच एजेंसि यां, न्याय व्यवस्था, शैक्षणिक संस्थान, परिवार, नागरिक समाज और आम नागरिक समान प्रतिबद्धता के साथ इस अभियान का हिस्सा बनते हैं, तो जीरो टालरेंस केवल एक सरकारी नारा नहीं बल्कि भार त कोनशा- मुक्त सुरक्षित और सशक्त राष्ट्र बनाने की ऐति हासिक पहल सिद्ध हो सकती है। आने वाले वर्ष वास्तव में यह तय करेंगे कि भारत नशे की चुनौती के सामने झुकता है या संगठित, वैज्ञानिक, सम न्वित प्रयासों से उस पर निर्णा यक विजय प्राप्त करता है।