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एफसीएम इंजेक्शन से बढ़ रहा हीमोग्लोबिन, सुरक्षित मातृत्व को मिल रही नई मजबूती

(राममिलन शर्मा)
रायबरेली। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु, दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जनपद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 21 मार्च 2026 से फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन की सुविधा शुरू की गई है। पिछले तीन माह में जिले की 286 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया है। इन में से 96 महिलाओं की एक माह बाद पुनः हीमोग्लोबिन जांच की गई, जिसमें औसतन 1.5 से 2.5 ग्राम प्रति डेसी लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई। यह परिणाम दर्शाते हैं कि समय पर उपचार, नियमित मानिटरिंग और फालोअप से मातृ एनीमिया नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सकता है।
रोशनी की कहानी बनी अन्य गर्भवतियों के लिए प्रेरणा-
सलोन ब्लाक के ग्राम सरैया निवासी रोशनी इस अभियान से लाभान्वित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) सत्र के दौरान हुई जांच में उनका हीमोग्लोबिन 8 ग्राम प्रति डेसी लीटर पाया गया। एएनएम अंज ना मिश्रा की सलाह और आशा कार्यकर्ता मीरा देवी के सह योग से उन्हें प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) सलोन में उपचार कराया गया। 5 मई 2026 को उन्हें एफसीएम इंजे क्शन लगाया गया। एक माह बाद हुई जांच में उनका हीमो ग्लोबिन बढ़कर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया। अब वह स्वयं को पहले की अपेक्षा अधिक स्वस्थ, ऊर्जावान और सक्रिय महसूस करती हैं।
रोशनी कहती हैं, ‘मुझे इस उपचार से बहुत लाभ मिला है। अब पहले जैसी कमजोरी नहीं रहती। मैं सभी गर्भवती महिलाओं से अपील करती हूं कि वे नियमित प्रसव पूर्व जांच कराएं और हीमोग् लोबिन कम पाए जाने पर चिकित्सकीय परामर्श के अनु सार समय पर उपचार अवश्य लें। इससे मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है। समय पर पहचान और उपचार से घट रहा जोखिम-
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नवीन चंद्रा ने बताया कि एफसीएम इंजेक्शन के माध्यम से गंभीर एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की समय पर पहचान, त्वरित उपचार तथा नियमित निग रानी सुनिश्चित की जा रही है। यह पहल केवल हीमोग् लोबिन सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ नवजात और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने बताया कि एफ सीएम इंजेक्शन शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करता है, जो लिवर, स्पलीन और बोन मैरो में संग्र हित होकर आवश्यकता अनु सार हीमोग्लोबिन निर्माण में उपयोग होता है। इसी कारण उपचार के कुछ ही सप्ताह में हीमोग्लोबिन स्तर में स्पष्ट सुधार दिखाई देने लगता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यह भी कहा कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया समयपूर्व प्रसव, कम वजन के शिशु का जन्म, अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए सभी गर्भ वती महिलाओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच और चिकित्स कीय सलाह का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही उन्हों ने परिवार के सदस्यों, आशा कार्यकर्ताओं और समुदाय से अपील की कि वे प्रत्येक गर्भ वती महिला को समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। समुदाय की सक्रिय भागी दारी से ही मातृ एनीमिया पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षित मातृत्व का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
जिला महिला अस्पताल सहित पांच एफआरयू पर उप लब्ध सुविधा-
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस् थाना ने बताया कि इस पहल के तहत चिकित्सकों, स्टाफ नर्स एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। एफसीएम इंजेक्शन के साथ आवश्यकतानुसार आईवी आय रन सुक्रोज, आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) अनुपूरण तथा कैल्शियम टैबलेट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह सुविधा जिला महिला अस्पताल सहित सलोन, ऊंचा हार, बछरावां, लालगंज और डलमऊ एफआरयू पर उपलब्द्द है। अब तक जिला महिला अस्पताल में 43, सलोन में 70, ऊंचाहार में 24, बछरावां में 45, लालगंज में 51 तथा डलमऊ में 53 गर्भवती एवं द्दात्री महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया जा चुका है।