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उम्र के साथ त्वचा की देखभाल भी जरूरी

(साधना जयसवाल)
हमारे शारीरिक सौंदर्य में स्वस्थ संुदर त्वचा का अपना एक अलग महत्व है। बढ़ती उम्र के साथ त्वचा में भी बद लाव आने लगते हैं उम्र के साथ त्वचा की आवश्य-कताएं भी बदलती है, क्योंकि हर उम्र में त्वचा की जरूरतें अलग- अलग होती हैं। इसलिए हर आयु वर्ग मंे त्वचा की देखभाल जरूरी है। नवजात शिशु
इस वक्त शिशु की त्वचा अपरिपक्व होती है। इसलिए इसे धूप से बचाना चाहिए। शिशु पर हल्के साबुन का प्रयोग कर उसे नहलाएं। विभिन्न सनस्क्रीन्स व अन्य लोशन्स से शिशु की त्वचा को बचाएं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इनमे नुकसान दायक तत्व हो सक ते हैं, जिन्हें शिशु की अपरिप क्व त्वचा जज्ब कर लेती है। बचपनः- इस अवस्था में हल्के साबुन का इस्तेमाल कर स्नान करना ही काफी है। सनस्क्रीन लगाकर त्वचा की रक्षा करें।
किशोरावस्थाः
इस दौरान चेहरे को दो बार द्दोना आवश्यक है। इस अवस्था में शरीर की स्वेद (पसीना) व तैलीय ग्रंथियां विकसित हो रही होती हंै। लापरवाही बरतने से इन गं्रथियों में रूकावट पैदा हो सकती है। इस कारण मुँहासे पैदा हो सकते हैं। आमतौर पर इस अवस्था में म्वाइश्चराइजर की जरूरत नहीं पड़ती। सनस्क्रीन का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि समस्त जीवनकाल का 80 प्रतिशत सन एक्सपोजर 20 साल के पहले ही होता है।
20 से 29 वर्ष-त्वचा की तैलीय ग्रंथियों की क्षमता कम होने लगती है। अतः म्वाइश्च राइजर अवश्य लगाएं, पर त्वचा को कई बार न द्दोएं।
30 से 39 वर्ष-यदि आपने म्वाइचराइजर का प्रयोग अभी तक शुरू न किया हो तो इस का प्रयोग शुरू कर दें। सन स्क्रीन अवश्य लगाएं अन्यथा चेहरे पर धब्बे व झाइयाँ पड़नी शुरू हो जाएंगी।
40 से 49 वर्ष-इस वक्त त्वचा ढ़ीली होकर अपनी चमक खोने लगती है। इस अवस्था में प्रतिदिन म्वाइश्चराइजर का प्रयोग करें। सनस्क्रीन के अ लावा ‘एंटी एजिंग कास्मेटिक्स’ के प्रयोग की भी जरूरत है।
50 से 70 वर्ष-चेहरे पर झुर्रियां पड़नी शुरू हो जाती हैं। इस वक्त त्वचा की हीलिंग कैपेसिटी (त्वचा के कटने-फ टने की स्थिति में नई त्वचा का निकलना) क्षीण हो जाती है। इसलिए त्वचा को चोट- घाव आदि से बचाएं। चेहरा कम धोएं। म्वाश्चराइजर व सनस्क्रीन का प्रयोग करें।

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