सर्दियों में नवजात को हाइपोथर्मिया से बचाये

RAJNITIK BULLET
0 0
Read Time2 Minute, 50 Second

(मनोज मौर्य) रायबरेली। नवजात को हाइपोथर्मिया यानि ठंडा बुखार हो सकता है जो कि सावधानी न बरतने पर घातक साबित हो सकता है। हाइपोथर्मिया की स्थिति में नवजात के शरीर का ताप मान 36.5 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है या नवजात का शरीर पर्याप्त गर्मी नहीं पैदा कर पाता है। समय से हाइपोथर्मिया के लक्षणों को पहचानकर हम किसी दुर्घटना से बच सकते हैं।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बाल रोग विशेषज्ञ) डा. वीरेन्द्र सिंह बताते हैं कि नवजात आसानी से हाइपोथर्मिया की गिरफ्त में आ जाते हैं क्योंकि उनकी त्वचा पतली होती है और वसा भी कम होता है। 
यदि नवजात में हाइपो- थर्मिया के लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले उसे माता/ पिता/देखभालकर्ता द्वारा सीने से लगाकर कंगारू मदर केयर (केएमसी) देकर उसके शरीर का तापमान नियंत्रित करना चाहिए। इसके साथ ही जिस कमरे में नवजात रहता है, उसे भी गरम रखना चाहिए। 
जाड़े में नवजात को सामान्य की अपेक्षा ज्यादा कपड़े पहनाए/ढक कर रखें, विशेष ध्यान रखें कि नवजात को सांस लेने मे दिक्कत न हों। बच्चे के हाथ, पैर व सिर ढक कर रखें। उन्हें खुला नहीं छोड़ना चाहिए। माँ का दूध अवश्य पिलाएँ, यह हाइपोथर्मिया से बचाता है।  
हाइपोथर्मिया के प्रबंधन के लिए सबसे जरूरी इससे बचाव है। ऐसी स्थिति आने ही नहीं देनी चाहिए। इसके लिए जन्म के तुरंत बाद नवजात को माँ के पेट पर, पेट के बल लिटा दिया जाता है या प्री हीटेड बेसिनेट में रखा जाता है। बच्चे को कपड़े से पोंछकर सुखाना चाहिए, शरीर को गर्म शीट में लपेटना चाहिए और सिर को भी ढक देना चाहिए। हाइपोथर्मिया की स्थिति में न तो बच्चे का वजन लेना चाहिए और न ही उसको नहलाना चाहिए।
हाइपोथर्मिया के लक्षण हैं – नवजात के हाथ, पैर व पेट ठंडा होना, सुस्त होना, सांस धीमी चलना, रोते समय आवाज कम होना या आवाज का न निकलना, अनियमित धड़कन, खून में आक्सीजन का निम्न स्तर हैं।

Next Post

जनमानस की समस्याओं को गंभीरता से लेकर अधिकारी करें निस्तारण -डीएम

(राम […]
👉