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भारत सहित दुनियाँ के अनेक देशों में आयोजित कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही मानवता की प्रगति का है आधार

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
गोंदिया (महाराष्ट्र)।
वैश्विक स्तर पर हर वर्ष मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विश्व समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जब महिलाएँ समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और मानव वि कास के हर क्षेत्र में अपने योग दान के लिए सम्मानित की जाती हैं। वर्ष 2026 में यह दिवस विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसकी केंद्रीय भाव ना केवल उत्सव तक सीमित नहीं है बल्कि अधिकार, न्याय और हर महिला तथा बालिका के सशक्तिकरण के लिए वास्त विक कार्रवाई पर केंद्रित है।
आज जब विश्व तेजी से बदल रहा है, तब महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को विकास का आधार माना जा रहा है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि लैंगिक समान ता केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं,बल्कि स्थायी विकास और वैश्विक शांति की अनिवार्य शर्त है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल समस्याओं पर चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की उपलब्धि यों का उत्सव भी है।
आज महिलाएँ विज्ञान, अंत रिक्ष, राजनीति, खेल, रक्षा, व्य वसाय और कला जैसे क्षेत्रों में अद्भुत उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं। विश्व भर में महिला वैज्ञानिकों, उद्यमियों, खिलाड़ियों और नेताओं ने यह साबित किया है कि अव सर मिलने पर महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं। इस दिन विभिन्न देशों में सम्मान समारोह, सम्मे लन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजि त किए जाते हैं, जिनका उद्दे श्य महिलाओं के योगदान को पहचान देना और समाज को प्रेरित करना होता है।
साथियों बात अगर हम गिव टू गेन अभियान और वैश् िवक सहयोग को समझने की करें तो, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर विश्व स्तर पर गिव टू गेन अभि यान भी चर्चा में है। इस अभि यान का मुख्य संदेश है कि लैंगिक समानता को प्राप्त कर ने के लिए सहयोग, सहानुभूति और उदारता आवश्यक हैं। समाज में जब महिलाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों में आगे बढ़ती हैं, तो उसका लाभ पूरे समाज को मिलता है। इसलिए यह अभियान लोगों को प्रेरित करता है कि वे अपने संसाधनों, समय और ज्ञान का उपयोग महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए करें। इस प्रकार यह अभियान सामूहिक प्रगति के विचार को मजबूत करता है।भारत में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहाँ महिलाओं की भूमिका सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण रही है। भारतीय समाज में महिलाओं को शक्ति, ज्ञान और सृजन की प्रतीक माना जाता है। हालांकि इति हास के कई दौर में उन्हें सामा जिक सीमाओं और असमान ताओं का सामना भी करना पड़ा है। आज भारत सरकार और विभिन्न सामाजिक संग ठनों द्वारा महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। महिला दिवस के अवसर पर इन प्रयासों को आगे बढ़ाने और नई पहल शुरू करने का एक सटीक अवसर मिलता है।
साथियों बात अगर हम भारत सरकार का राष्ट्रीय समा रोह, मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली को जानने की करें तो, 8 मार्च 2026 को भारत सरकार अंत र्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित कर रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा नई दिल् ली स्थित मानेकश सेंटर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति होंगी। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा राज्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगी।यह आयोजन भारत में महिला- नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विभिन्न आडियो -विजुअल प्रस्तुतियाँ प्रदर्शित की जाएँगी, जिनमें महिलाओं की कार्यबल में बढ़ती भागीदा री और सरकार की प्रमुख यो जनाओं को दर्शाया जाएगा। पैनल चर्चाएँ और नीति संवाद कार्यक्रम के दौरान दो महत्व पूर्ण पैनल चर्चाएँ आयोजित की जाएँगी। पहली चर्चा श्रम संहिता, महिलाओं के सशक्ति करण को बढ़ावा विषय पर होगी, जिसमें कार्यस्थलों पर समान अवसर, सुरक्षा और श्रम अधिकारों पर विचार किया जाएगा। दूसरी पैनल चर्चा उद्यमी के रूप में स्वयं सहा यता समूह की महिलाएँ” विषय पर केंद्रित होगी, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा होगी। इन चर्चाओं में विशेषज्ञ, नीति निर्माता और महिला नेता भाग लेंगे। इस समारोह में 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों की लगभग 1,000 महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इनमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल और उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों की महिला प्रतिनिधि होंगी। यह विविधता इस बात का प्रतीक है कि भारत में महिलाएँ हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और देश के विकास में बहुत ही सटीक योगदान दे रही हैं।
साथियों बात अगर हम शक्ति वाक-शी लीड्स, बिल्ड्स भारत पदयात्रा को जानने की करें तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर शक्ति वाक- शी लीड्स, बिल्ड् स भारत शीर्षक से एक महि ला नेतृत्व वाली पदयात्रा भी आयोजित की जाएगी। यह पदयात्रा सुबह 7ः30 बजे से 10 बजे तक चलेगी और इंडि या गेट से विजय चैक तक लगभग दो किलोमीटर का मार्ग तय किया जाएगा। इस आयो जन में लगभग 3,000 महिलाओं के भाग लेने की उम्मीद है, जिनमें विभिन्न मंत्रालयों, संग ठनों, सशस्त्र बलों, पुलिस, मी डिया और सामाजिक संस्थाओं की प्रतिनिद्दि शामिल होंगी।
इस पदयात्रा का उद्देश्य यह संदेश देना है कि भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है। जब महि लाएँ नेतृत्व करती हैं, तो समा ज में समावेशी और संतुलित विकास की संभावना बढ़ती है। इसलिए शी लीड्स, बिल्ड्स भारत का संदेश यह दर्शाता है कि महिलाएँ केवल विकास की सहभागी ही नहीं, बल्कि उसकी निर्माता भी हैं। शक्ति वाक के दौरान कर्तव्य पथ के किनारे प्रदर्शनियाँ ल गाई जाएँगी, जिनमें महिलाओं के लिए सरकार की प्रमुख योजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही इंडि या गेट पर सांस्कृतिक प्रस्तु तियाँ आयोजित होंगी, जिनमें डोलू कुनिथा, कलरिपयट्टू श्रृंगा रिमेलम, रंचंडी और घूमर जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल होंगे। ये प्रस्तुतियाँ भारत की सांस् कृतिक विविधता और महिला ओं की शक्ति का प्रतीक होंगी।
साथियों बात अगर हम नारी शक्ति से विकसित भारत राष्ट्रीय सम्मेलन को जानने की करें तोमहिला दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के वि ज्ञान भवन में नारी शक्ति से विकसित भारत विषय पर राष् ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन भारती नारी से नारायणी शीर्षक के अंतर्गत आयोजित होगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को परिवार की सीमाओं से आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण की सक्रिय शक्ति के रूप में स्थापित करना है। सम्मेलन का उद्देश्य औरदृदृष्टिकोण इस सम्मेलन का लक्ष्य एक ऐसा मंच तैयार कर ना है जहाँ महिलाएँ जुड़ें, विचार साझा करें और समाधान प्रस् तुत करें। यह मंच नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सम्मे लन के माध्यम से सरकार को बहुआयामी नीति सुझाव दिए जाएंगे और महिला नेतृत्व का राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार कर ने का प्रयास किया जाएगा।
साथियों बात अगर हम सम्मेलन में आठ प्रमुख विषयों परहोने वाले विचार-विमर्श को समझने की करें तो विद्या, शक्ति, मुक्ति, चेतना, प्रकृति, संस्कृति, सिद्धि और कृति। ये विषय भारतीय महिला की आंत रिक यात्रा और विकास के विभिन्न आयामों को दर्शाते हैं। शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भ रता सामाजिक स्वतंत्रता, नेतृत्व, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक मूल्यों और व्यावहारिक कार्य योजनाओं पर गहन चर्चा की जाएगी।इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में विश्व बैंक, यूनिसेफ, संयुक्त राष्ट्र महिला,संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिला सशक्तिकरण का मुद्दा केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश् िवक महत्व का विषय है। सोशल मीडिया अभियान-शी बिल्ड्स भारत महिला दिवस के अवसर पर शी बिल्ड्स भारत हैशटैग के साथ एक सोशल मीडिया अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभि यान का उद्देश्य महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियों को सा झा करना और समाज में सका रात्मक बदलाव के लिए जाग रूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। साथियों बात अगर हम महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत 2047 को समझने की करें तो, भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महिलाओं की भूमि का अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, उद्यमिता, नवाचार और नेतृत्व मेंमहिलाओं की भागीदारी बढ़ा कर ही भारत समावेशी और टिकाऊ विकास हासिल कर सकता है। समाज में बदलाव की आवश्यकता हालांकि प्रग ति के बावजूद महिलाओं के सामने कई चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव, असमान वेतन और शिक्षा में असमानता जैसी समस्याएँ कई समाजों में देखी जाती हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची समानता के लिए सामाजिक सोच और व्यवहार में बदलाव आवश्यक है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि समानता और सश क्तिकरण की ओर वैश्विक यात्रा, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 केवल एक उत्सव नहीं बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का प्रतीक है, जो महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समा नता के लिए निरंतर प्रयासों को प्रेरित करता है। भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में आयोजित कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही मानवता की प्रगति का आधार है।
जब महिलाएँ शिक्षा, रोज गार, नेतृत्व और निर्णय-निर्माण में समान भागीदारी प्राप्त करेंगी, तब ही समाज वास्तव में न्या यपूर्ण और समृद्ध बन सकेगा। इसलिए यह दिवस हमें यह संकल्प लेने का अव सर देता है कि हम एक ऐसे भविष्य का निर्माण करें जहाँ हर महिला और बालिका सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त जीवन जी सके।

 

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