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वैश्य समाज किसी पार्टी का बंधुआ मतदाता नहीं, सम्मान और हिस्सेदारी देने वालों के साथ जाएगा – प्रभात साहू

वैश्य एकता परिषद के महासम्मेलन में राजनीतिक भागीदारी का उठा मुद्दा, प्रभात साहू बोलेकृसमाज की उपेक्षा अब राजनीतिक दलों को पड़ेगी भारी
(राममिलन शर्मा)
रायबरेली। जनपद मे आ गामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले वैश्य समाज ने अपनी राजनीतिक ताकत और भागी दारी को लेकर स्पष्ट संदेश देना शुरू कर दिया है। राय बरेली के रिफार्म क्लब में आ योजित वैश्य एकता परिषद के महासम्मेलन में समाज के नेताओं ने दो टूक कहा कि अब वैश्य समाज किसी राजनी तिक दल का बंधुआ मतदाता बनकर नहीं रहेगा।
जो पार्टी समाज को सम् मान, प्रतिनिधित्व और टिकट में उचित हिस्सेदारी देगी, समाज उसी के साथ खड़ा होने पर विचार करेगा। सम्मे लन में उठे इन सवालों ने आगा मी चुनाव में वैश्य समाज की भूमिका को लेकर नई राजनी तिक चर्चा छेड़ दी है।
महासम्मेलन में विशेष रूप से मौजूद महाराजगंज नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रभात साहू ने राजनीतिक दलों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि आर्थिक रूप से देश और समा ज को मजबूती देने वाले वैश्य समाज की राजनीतिक उपेक्षा अब ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि समाज अब अपने अधिकारों और राजनी तिक हिस्सेदारी को लेकर जाग रूक हो चुका है। आने वाले चुनाव में समाज की एकजु टता और उसका निर्णय राज नीतिक दलों के लिए महत्व पूर्ण साबित हो सकता है।
वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सुमंत गुप्ता ने कहा कि वैश्य समाज ने जनसंघ के दौर से ही भार तीय जनता पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उस समय चुनाव हारने की आशंका के बावजूद समाज के लोगों ने पार्टी के लिए मेहनत की और चुनाव लड़े, ताकि संगठन मजबूत हो सके। लेकिन वर्तमान राजनी तिक परिस्थितियों में समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब समाज अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेगा। जिस पार्टी से सम्मान और टिकट के माध्यम से उचित भागीदारी मिलेगी, समाज उसके साथ जाने पर विचार करेगा। डा. सुमंत गुप्ता ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर वैश्य समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि विधान परिषद में समाज को एक भी टिकट नहीं दिया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश की वैश्य बहुल विधानसभा सीटों पर भी समा ज को अपेक्षित अवसर नहीं मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों को अब वैश्य समाज को केवल परंप रागत वोट बैंक समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।
महासम्मेलन में प्रभात साहू ने भी समाज की राजनीतिक भागीदारी को प्रमुखता से उठा ते हुए कहा कि वैश्य समाज की ताकत केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी संगठित राज नीतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब समाज अपने हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का निर्णय कर चुका है। आने वाले विधानसभा चुनाव में समाज की रणनीति और उसका रुख कई राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
परिषद के राष्ट्रीय महास चिव इंजीनियर विजय रस्तोगी ने कहा कि महासम्मेलन का उद्देश्य आगामी विधानसभा चु नाव में वैश्य समाज की भूमिका और राजनीतिक दिशा तय कर ने के लिए विचार- विमर्श करना है। वहीं, परिषद के जिलाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि आगामी चुनाव में जिले के राजनीतिक माहौल में बद लाव देखने को मिल सकता है समाज का फैसला राजनीतिक दलों को चैंका सकता है।
सम्मेलन में विभिन्न राज नीतिक दलों से जुड़े वैश्य समा ज के नेताओं और जनप्रतिनि धियों की मौजूदगी ने आयोजन को राजनीतिक रूप से महत्व पूर्ण बना दिया। मंच पर नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद कौशल, सरिता साहू के प्रतिनिधि प्रभात साहू, लालगंज नगर पंचायत अध्यक्ष सरिता गुप्ता, ऊंचाहार नगर पंचायत अध्यक्ष ममता जायसवाल और फतेहपुर के विधायक विकास गुप्ता सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
इसके अलावा आरबी वैश्य, फूलचंद्र अग्रहरि, अग्रहरि समा ज के जिलाध्यक्ष राजेंद्र वैश्य, उत्तर प्रदेश युवा उद्योग व्या पार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अतुल गुप्ता, दीपेंद्र गुप्ता, चेयर मैन प्रतिनिधि कृष्ण चंद्र जाय सवाल, महिला जिलाध्यक्ष आ राधना कौशल गुप्ता, महिला जिला महामंत्री पूजा, महिला कोषाध्यक्ष सावित्री गुप्ता, वीरेंद्र कुमार अग्रहरि, सुधीर गुप्ता, आलोक गुप्ता एडवोकेट और शिवसागर अग्रहरि सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।
महासम्मेलन का सियासी संदेश साफ हैरू वैश्य समाज अब अपनी राजनीतिक भागी दारी, सम्मान और हिस्सेदारी को लेकर खुलकर आवाज उठा रहा है। महाराजगंज नगर पं चायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रभात साहू समेत सम्मेलन में शामिल नेताओं ने जिस तरह समाज की एकजुटता पर जोर दिया, उससे साफ है कि आगामी वि धानसभा चुनाव में वैश्य समाज की राजनीतिक भूमि का चर्चा के केंद्र में रह सकती है। अब देखना होगा कि राज नीतिक दल समाज की इस मांग को कितनी गंभीरता से लेते हैं और उसे प्रतिनिधित्व देने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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