श्रद्धा हत्याकांड पर बोले ओवैसी, ये लव जिहाद का मामला नहीं, सियासी रोटी सेंक रही बीजेपी

RAJNITIK BULLET
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Nov 24, 2022
असदुद्दीन ओवैसी ने साफ तौर पर लव जिहाद के मामले से इनकार किया है। उन्होंने भाजपा पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया। अपने बयान में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बीजेपी की सियासत बिल्कुल गलत है। यह लव जिहाद का मामला नहीं है।

देश में श्रद्धा मर्डर केस को लेकर चर्चा लगातार जारी है। श्रद्धा की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर आफताब ने गला घोंटकर की थी। आफताब फिलहाल पुलिस हिरासत में है और उसे से इस मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। यह मर्डर केस 6 महीने के बाद सामने आया है। भाजपा इसे लेकर लगातार लव जिहाद का मुद्दा उठा रही है। इन सबके बीच एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी ने साफ तौर पर लव जिहाद के मामले से इनकार किया है। उन्होंने भाजपा पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया। अपने बयान में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बीजेपी की सियासत बिल्कुल गलत है। यह लव जिहाद का मामला नहीं है।

ओवैसी ने आगे कहा कि ये महिला की हत्या, उस पर जुल्म, अत्याचार का वाक्या है। हमने इसकी निंदा की है। देश के मर्दों के दिमाग में महिलाओं पर जुल्म करने की बीमारी है, उनके दिमाग का इलाज कराना चाहिए। वहीं भाजपा के कुछ नेताओं ने इस मामले को पूरी तरीके से लव जिहाद जोड़ा था। लेकिन ओवैसी ने साफ तौर पर कहा है कि यदि इसे मजहब का चश्मा लगाकर देखते हैं तो यह नाइंसाफी होगी। उन्होंने सवाल किया कि अगर यह लव जिहाद है तो आजमगढ़ में प्रिंस यादव का फिर मामला क्या था। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी साफ तौर पर कहा था कि देश को लव जिहाद के खिलाफ एक सख्त कानून की जरूरत है।

वहीं, दूसरी ओर श्रद्धा वालकर की हत्या मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की पॉलीग्राफी जांच का दूसरा सत्र रोहिणी में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में शुरू हुआ। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को जांच नहीं हो पायी थी क्योंकि 28 वर्षीय पूनावाला को बुखार तथा जुकाम था। एफएसएल के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस उसे यहां लेकर आयी और पॉलीग्राफी जांच की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इस जांच में देरी से पूनावाला की नार्को जांच में भी देरी हो गयी है। पॉलीग्राफी जांच में रक्तचाप, नब्ज और सांस की दर जैसी शारीरिक गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है और इन आंकड़ों का इस्तेमाल यह पता लगाने में किया जाता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या नहीं।

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